प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि रविवार को डीसी अनीता यादव यदि सख्त तरीका नहीं अपनाती तो शायद छावनी मोहल्ले का नामोनिशान न बचता। चर्चा है कि छावनी मोहल्ले में हिंसा की सूचना के बावजूद इसकी रोकथाम के लिए समय पर फोर्स नहीं पहुंच पाई। वहीं लोगों के आरोप तो इससे भी गंभीर है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। बाद में डीसी ने हस्तक्षेप किया और वो खुद ही फोर्स को लेकर मौके पर पहुंच गई। इसके बाद हालात पर कंट्रोल पाया जा सका। वहीं दूसरी ओर पुलिस अधिकारी आरोपों को नकारते हुए हर वो कार्रवाई करने का दावा कर रहे हैं, जो कि जरूरी थी।बताया जा रहा है कि रविवार को 12 बजे के करीब छावनी मोहल्ले में हिसा भड़क उठी थी। एक जाति विशेष के लोगों ने दूसरों पर जमकर कहर ढाया। पूरे मोहल्ले में त्राहि-त्राहि मच गई। बार-बार सूचना देने के बावजूद प्रशासन की ओर से किस प्रकार की मदद नहीं मिली। करीब आधे घंटे तक यहां लोग उत्पात मचाते रहे। इसी बीच मामले की सूचना डीसी अनीता यादव को मिली तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई को कहा, लेकिन पुलिस व सेना नहीं पहुंच पाई। सूत्रों का कहना है कि ढिलाई देखते हुए डीसी ने सरकार को तुरंत पत्र लिखकर पुलिस व अधिकारियों के रवैये की जानकारी दी। केंद्रीय गृह मंत्रालय से आदेश आए कि वे सेना को खुद कंट्रोल में लेकर कार्रवाई करें। इसके बाद डीसी फोर्स के साथ छावनी मोहल्ला पहुंची और उपद्रवियों को खदेड़ा।
बोली डीसी...छावनी मोहल्ले में कोई उपद्रव हुआ है, जैसे ही उनको सूचना मिली कि फोर्स के साथ खुद ही निकल पड़ी। कुछ देर में ही वहां की स्थिति को कंट्रोल किया गया। लोगों के फोन उनको आए थे और स्थिति की भयावहता को देखते हुए वे बिना किसी का इंतजार किए तुरंत वहां पहुंची। आपसी तालमेल से ही काम संभव है, यही उन्होंने किया। उन्होंने किसी की शिकायत नहीं की।-अनीता यादव, डीसी
बोले आईजीपुलिस ने हर सूचना को गंभीरता से लिया। मामला कोई एक दो पुलिस कर्मियों को भेज कर कार्रवाई करने जैसा नहीं था, बल्कि यहां तो पूरी टीम को मूव करना था। कहीं भी पूरी स्पीड के साथ जाना संभव नहीं था। 26 व्यक्तियों को तुरंत गिरफ्तार किया गया। जो इसके लिए जिम्मेदार हैं, उनको भुगतना पड़ेगा।-के के राव, आईजी