शहर में रविवार को फैली एक अफवाह ने शाम होते-होते यहां के सुरक्षा बंदोबस्त में पुलिस की ओर से बरती जा रही लापरवाही को उजागर कर दिया।
शहर की सीमाओं पर नाकाबंदी के लिए रविवार की रात बेरिगेड्स तो लगे थे, लेकिन पुलिसकर्मी नदारद मिले। शहर के भीतर भी चौक और चौराहों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं दिखे।
केवल गोरक्षा दल के सदस्य नजर आए, जिन्होंने गोतस्करों को पकड़ने के लिए स्वयं सीमाओं पर नाकाबंदी की कमान संभाल रखी थी।
गोभक्तों का कहना है कि अगर पुलिस अपना काम सही तरीके से करे तो गोतस्करी समेत वे तमाम वारदातें रोकी जा सकती है, जो कि रात के अंधेरे में अंजाम दी जाती है।
गोरक्षा दल के सदस्यों को रविवार की शाम चार बजे सूचना मिली थी पुलिस ने आज गायों से भरा ट्रक पकड़ा है, जिन्हें कि तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था।
गोभक्तों ने इस बारे में जब पुलिस अधिकारियों से बात की तो उन्होंने ऐसी कोई घटना होने से साफ इनकार कर दिया।
इस अफवाह से गोरक्षा दल के सदस्य अलर्ट हो गए और उन्होंने शहर की सभी सीमाओें पर रात को निगरानी रखने का निर्णय लिया।
गोरक्षा दल के जिला प्रधान जयबीर आर्य के नेतृत्व में गोभक्त सभी सीमाओं पर तैनात हो गए और प्रत्येक आने-जाने वाले वाहन पर नजर रखी।
सूचना मिलने पर जब अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि सीमाओं पर गोभक्त तो तैनात हैं, लेकिन पुलिसकर्मी नदारद हैं।
जब गोभक्तों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके आने से पहले भी कोई पुलिसकर्मी नहीं था। जिला प्रधान जयबीर आर्य ने कहा कि उन्होंने इसी कारण स्वयं गायों की सुरक्षा का जिम्मा उठाया है।
दिन में सूचना मिली थी कि पुलिस ने आवारा गायों से भरा ट्रक पकड़ा है, लेकिन पुलिस ने इसे अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि अगर रात के समय गश्त और नाकाबंदी सही तरीके से हो,
तो गोतस्करी समेत अन्य अपराधों पर नकेल कसी जा सकती है। गोरक्षा दल ने इस बारे में पुलिस अधीक्षक से भी मिलने की बात कही है।
एसपी के आदेशों को नहीं लिया गंभीरता से
एसपी राजेश दुग्गल ने करीब एक सप्ताह पहले ही पदभार संभाला है। ज्वाइनिंग के समय ही एसपी ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए थे कि गश्त और नाकाबंदी में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
एसपी ने उस समय खुद माना था कि शहर में पुलिस की गश्त बहुत कम है और यहां नाकेबंदी किए जाने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा था कि रोहतक और फरीदाबाद की तरह ही झज्जर में भी स्थायी नाकाबंदी की जाएगी।
जहां नाकाबंदी संभव नहीं है, वहां पर पुलिस की पीसीआर और राइडर गश्त करेंगे। इससे लोगों में सुरक्षा की भावना आएगी तथा लोगों का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा।
एसपी के निर्देश पर बेरिगेड्स तो लगा दिए गए, लेकिन यहां पुलिस के जवानों की तैनाती अभी भी नजर नहीं आ रही है।
शहर में हो चुकी हैं चोरी की कई वारदातें
शहर में चोरी की वारदातें भी थमने का नाम नहीं ले रही। बीते शनिवार को जहां दमदमा मोहल्ला स्थित ताराचंद भुटानी के मकान से चार डेढ़ लाख रुपये के आभूषण और नकदी चुरा ले गए, वहीं करीब दस दिन पहले लकड़ा मोड़ निवासी विरेंद्र अत्री के घर से चोरों ने साढ़े चार लाख रुपये के गहने और नकदी चुरा ली थी।
चोर सीसीटीवी में भी कैद हुए थे, लेकिन उनका अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। इससे पहले तीन नवंबर को भी शहर के एक मकान में 15 लाख रुपये के गहने और नकदी चोरी हो गई थी।
कुछ दिन पहले बेरी में बाइक सवार तीन युवकों ने एक शीशी व्यापारी पर फायरिंग कर जानलेवा हमला किया था। इन सबके बावजूद सुरक्षा बंदोबस्त में लापरवाही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ी करती है।
शहर में नियमित नाकाबंदी के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं। रविवार को भी क्राइम मीटिंग के दौरान स्थायी नाके और गश्त के लिए पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
अगर कहीं पर लापरवाही की जा रही है, तो इसकी जांच की जाएगी। संबंधित अधिकारियों से भी इस बारे में जानकारी ली जाएगी।
चमनलाल, पीआरओ, झज्जर पुलिस