झाड़ोदा बॉर्डर से शुक्रवार को आते-जाते वाहन। -संवाद
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बहादुरगढ़। कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर 15 दिनों से चल रहे किसान आंदोलन के कारण बंद किए गए झाड़ोदा बॉर्डर को खुलने के बाद वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है। यहां से भारी वाहनों की एंट्री तो नहीं हो रही है, लेकिन प्राइवेट वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से चालू कर दी गई है। दरअसल यहां किसानों की संख्या कम होने के चलते दिल्ली पुलिस इसे खोलने का फैसला लिया है। शुक्रवार को दिन भर यहां से वाहनों का आवागमन हुआ। दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ और बीएसएफ पूरी मुस्तैदी के साथ यहां डटी हुई है। दिल्ली में घुसने वाले हर वाहन की जांच की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने यह बॉर्डर 15 दिनों बाद खोला है, हालांकि बार्डर पर बैरिकेड जरूर लगाए गए हैं। टीकरी बॉर्डर पर चल रहे धरना-प्रदर्शन के कारण अभी आवाजाही बंद है।
दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवान यहां पर तैनात हैं, जो एक-एक करके वाहनों को बॉर्डर से निकालते हैं। इस कारण यहां पर वाहनों की संख्या अधिक होने की वजह से रह-रहकर जाम की स्थिति भी बन जाती है। झाड़ोदा बॉर्डर खुलने से वाहन चालकों के साथ-साथ दिल्ली से आवागमन करने वाले लोगों ने भी राहत की सांस ली है। दरअसल, बहादुरगढ़ में हजारों की संख्या में औद्योगिक इकाईयां हैं। इनके संचालक दिल्ली में ही निवास करते हैं और प्रतिदिन दिल्ली से यहां बहादुरगढ़ आना-जाना होता है। पिछले 10 दिनों से बंद चल रहे सभी बॉर्डरों की वजह से यहां वाहन आ-जा नहीं पा रहे थे, झाड़ोदा बॉर्डर खुलने से चालकों है।
दिल्ली में भेजा उद्यमियों ने कच्चा और तैयार माल
बहादुरगढ़ में औद्योगिक इकाई चलाने वाले सुनील शर्मा का कहना है कि कई दिनों से दिल्ली में माल न तो जा रहा है और न ही वहां से फैक्ट्रियों में आ पा रहा था। शुक्रवार को झाड़ोदा बॉर्डर खुला तो कुछ राहत मिली। बहादुरगढ़ से दिल्ली व दिल्ली से बहादुरगढ़ में फैक्ट्रियों में माल मंगवाया गया।
उद्यमियों ने दिए हैं आर्डर
बहादुरगढ़ में झाड़ोदा बॉर्डर खुलने के बाद उद्यमियों ने दिल्ली से कच्चा माल मंगवाने के लिए आर्डर भी दिए हैं। लेकिन अब भी उन्हें आशंका है कि कहीं दिल्ली पुलिस उसे फिर से बंद न कर दें। झाडोदा बॉर्डर खुलने से दिल्ली से आवागमन करने वाले उद्यमियों ने काफी राहत की सांस ली है। अब वे आसानी से अपनी फैक्ट्रियों में भी आ जा सकेंगे।