पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में तीन खंडों बेरी, मातनहेल व साल्हावास की 116 गांवों की चौधर पर रविवार को मुहर लग गई। इन गांवों में से 50 चौधर पर महिलाओं का कब्जा हुआ है। चुने गए सरपंच युवा हैं, जिनकी औसत आयु 37 वर्ष तक है।
नव निर्वाचित सरपंचों में 10 ग्रेजुएट हैं, जिनमें से 4 महिलाएं हैं। रविवार को पंचायत चुनाव में तीन खंडों में जो नतीजे आए उनमें बेरी में 18 मातनहेल में 16 और साल्हावास में 16 महिला सरपंच चुनी गई हैं।
इनमें से चार महिला सरपंच जहां ग्रेजुएट या इससे ज्यादा पढ़ी लिखी हैं, वहीं 15 महिला सरपंच आठवीं पास और 31 दसवीं पास हैं। जिन गांवों में ग्रेजुएट महिला सरपंच मिली है, उनमें सेरिया में मानिका, बीड़ छुछकवास में मीना, बहु में भारपति देवी और कालियावास में प्रियंका शामिल है।
खास बात है कि मातनहेल जैसे पिछड़े इलाके को तीन ग्रेजुएट महिला सरपंच मिली हैं। एक ग्रेजुएट महिला सरपंच बेरी क्षेत्र से हैं। बात साल्हावास खंड की करें तो यहां कोई ग्रेजुएट महिला सरपंच नहीं है। 11 महिला सरपंच 10वीं पास हैं, तो 5 पांचवीं तक ही पढ़ी लिखी हैं।
किस वर्ग से कितनी महिला सरपंच
खंड बेरी, साल्हावास व मातनहेल के 116 गांवों में 50 महिला सरपंच बनी है। गांव में हर वर्ग की महिलाओं को नेतृत्व मिला है। सामान्य वर्ग से जहां 32 महिला सरपंच चुनी गई हैं। वहीं एससी वर्ग से 13, ओबीसी से 2 और बीसी वर्ग से 3 महिला सरपंच चुन कर आयी हैं।