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तीन बार बुलाया... लेकिन नहीं मिली बस तो पैदल चल दिए

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बिहार के लिए पैदल निकले प्रवासी श्रमिक। - फोटो : Jhjhar
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झज्जर। प्रदेश सरकार की ओर से हर रोज हजारों श्रमिकों को उनके घरों पर रेल गाड़ियों और बसों से भेजा जा रहा है। लेकिन उसके बाद भी बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक पैदल व जुगाड़ के वाहनों में पलायन कर रहे हैं। प्रवासी श्रमिकों का पलायन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। रात के समय सात बजे से सुबह सात बजे तक लॉकडाउन में बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। लेकिन ये श्रमिक चाहे रात हो या दिन अपने राज्यों की तरफ बढ़ रहे हैं। भिवानी से कानपुर जाने वाले प्रवासी श्रमिकों ने बताया कि उन्होंने 15 दिन पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा रखा था। लेकिन उन्हें बस न मिलने के कारण अब पैदल जाना पड़ रहा है।
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इसके अतिरिक्त बिहार के पटना के लिए जाने वाले जिले के छपार गांव में ठहरे प्रवासी श्रमिकों का कहना है कि वो भिवानी जिले में किसी फैक्टरी ने काम करते थे। उन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करवाया और प्रशासन की ओर से उन्हें बस स्टैंड पर भी बुलाया गया। लेकिन बस स्टैंड पर जाने के बाद उन्हें बस नहीं मिली। इस तरह प्रशासन ने उन्हें दो तीन बार बस स्टैंड बुलाया लेकिन हर बार बस नहीं मिलती जिसके चलते उन्होंने पैदल अपने घर जाना सही समझा। बीच रास्ते में झज्जर बाइपास पर एक होटल में खाना खाने के बाद फिर से अपने गंतव्य स्थान की ओर चल पड़े।
बिहार के लिए पैदल निकले श्रमिक
बिहार के पटना जाने के लिए 25 श्रमिकों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन करीब 20 दिन का समय बीतने के बाद भी जब घर जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं बन पाई तो पैदल ही घर जाना उचित समझा। छपार गांव में करीब दस दिन से पूरी तरह खाली बैठे थे, खर्चा भी नहीं बचा है। इसलिए खाली बैठकर क्या खाएंगे। परिवार वाले हर रोज फोन करके घर आने के लिए बोल रहे हैं। इसलिए पैदल जाना ही मजबूरी बन गया है।
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श्रमिकों की प्रतिक्रिया
बस नहीं मिलने के कारण अपने घर पैदल चलते हैं। घर पर परिवार वाले इंतजार कर रहे हैं। बार-बार फोन करके आने के लिए बोल रहे हैं।
केशव, कानपुर।
भिवानी जिले में फैक्टरी में काम करते थे। घर जाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करवाया लेकिन बस नहीं मिली। इसलिए पैदल चल पड़े।
अमन, कानपुर।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद भी कोई परिवहन की सुविधा नहीं मिली। जिसके चलते अब पैदल ही घर जाएंगे।
सोनू, कानपुर।
यहां से घर करीबन 600 किलोमीटर दूर होगा। शहर के बाद केएमपी हाईवे से होते हुए अपने घर जाएंगे।
अजय, कानपुर।
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