नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर के छात्र अपनी मातृभाषा के अलावा एक अन्य भारतीय भाषा की पढ़ाई कर सकेंगे।
यूजीसी ने इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखकर 2047 तक विकसित भारत के विजन के तहत अंतर-सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है।
भारतीय भाषा समिति (बीबीएस) की सिफारिशों पर आधारित इस योजना के तहत संस्थानों को छात्रों के लिए 22 भारतीय भाषाओं का विकल्प देना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप इस पहल का उद्देश्य छात्रों को किसी अन्य राज्य या क्षेत्र की भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे न केवल छात्रों की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बढ़ेगा, बल्कि अन्य क्षेत्रों में उनकी रोजगार क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
यह भाषाई कौशल बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस तीन चरणों में विभाजित होगा। इसमें छात्रों को सुविधानुसार प्रवेश और निकास का विकल्प मिलेगा। संस्थान इन कोर्स को एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (एईसी), क्रेडिट कोर्स या ऑडिट कोर्स के रूप में संचालित कर सकेंगे। यह कार्यक्रम नए क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत तीन अलग-अलग सेमेस्टर या तीन माइनर कोर्स के रूप में चलेगा।