बादली। उपमंडल स्तर पर छठ पूजा महोत्सव और गणेश मूर्ति विसर्जन के लिए कोई घाट और धार्मिक स्थल नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एनसीआर माइनर ही एकमात्र स्थल है, जहां श्रमिक एकत्रित होकर त्योहार की परंपरा निभाते हैं।
एनसीआर माइनर पर अमूमन बड़ी संख्या में लोग छठ पूजा में शामिल होते हैं। लेकिन, यहां पर प्रशासनिक रूप से अभी तक कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। माइनर पर घास-फूस और कीचड़ होने के कारण खतरा बना हुआ है। यहां कई बार दर्दनाक हादसे भी हो चुके हैं। यहां पर व्रतियों के लिए किनारे तक पहुंचना काफी खतरनाक है। माइनर पर प्रशासन की ओर से न तो प्रतिबंध लगाया जाता है और न ही कोई सुविधा दी जाती है। माइनर के सभी पुलों पर गंदगी और घास का आलम है। सीताराम और मुन्नाभाई का कहना है कि प्रशासन की ओर लोगों की धार्मिक भावनाओं को देखते हुए घाट की व्यवस्था की जानी है। अव्यवस्था के चलते एनसीआर माइनर पर जान जोखिम में डालकर परंपरा अनुसार धार्मिक रस्म करने पर लोग मजबूर हैं।
हो चुका है हादसा
छठ पूजा महोत्सव के लिए श्रमिकों के पास एनसीआर माइनर ही एकमात्र विकल्प होता है। दो माह पहले गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान दो श्रमिकों की पानी में बहने से मौत हो गई थी। दोनों श्रमिक दिल्ली से मूर्ति विसर्जन करने के लिए आए थे। दोनों के शव भी तीन दिन चले रेस्क्यू के बाद मिले। ऐेसे में प्रशासन की ओर से पुख्ता प्रबंधन करवाए जाने चाहिए।