मामला नगर परिषद की ओर से कुछ माह पहले चलाए गए प्रापर्टी आईडी सेल्फ सर्टिफिकेशन अभियान से जुड़ा बताया जा रहा है। करीब 87 हजार प्रापर्टी आईडी में से अब तक करीब 40 हजार सेल्फ सर्टिफाइड हुई हैं।
आरोप है कि कर्मचारियों ने डोर-टू-डोर जाकर संपत्तियों का सत्यापन करने के बजाय फैमिली आईडी में दर्ज नाम और मोबाइल नंबर के आधार पर प्रापर्टी आईडी का सेल्फ सर्टिफिकेशन कर दिया। एक ही नाम से कई प्रापर्टी आईडी मिलने पर फैमिली आईडी में दर्ज मोबाइल नंबर पर ओटीपी लेकर एक ही व्यक्ति के नाम पर कई संपत्तियां प्रमाणित कर दी गईं। इस प्रक्रिया में वास्तविक संपत्ति मालिकों की पहचान और उनके परिवार से संबंधित रिकॉर्ड का सही मिलान नहीं किया गया। इसका खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिनके नाम गलती से ऐसी संपत्तियां दर्ज हो गईं।
बहादुरगढ़ में पिछले करीब तीन माह में लगभग 653 परिवार बीपीएल सूची से बाहर हुए हैं। इनमें संपत्ति रिकॉर्ड से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र में फैमिली आईडी में 200 वर्ग गज या उससे अधिक क्षेत्रफल का प्लाट दर्ज होने पर परिवार बीपीएल श्रेणी से बाहर हो जाता है। ऐसे में गलत तरीके से दर्ज प्रापर्टी आईडी गरीब परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन गई हैं।
गलत प्रापर्टी आईडी दर्ज होने के बाद प्रभावित परिवार अब रिकॉर्ड दुरुस्त करवाने के लिए एसडीएम कार्यालय और नगर परिषद के चक्कर लगा रहे हैं। किसी के नाम एक, किसी के नाम पांच, आठ तो किसी के नाम 13 तक प्लाट दर्ज मिले हैं। लोगों का कहना है कि गलती उनकी नहीं है, लेकिन इसका नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से रिकॉर्ड की जांच करवाकर गलत प्रापर्टी आईडी हटाने और बीपीएल सूची में दोबारा शामिल करने की मांग की है।
मेहनत-मजदूरी करके पेट पाल रहे हैं। रहने को कोई मकान नहीं है। मेरी फैमिली आईडी में सात प्लाटों की प्रापर्टी आईडी दर्ज हो गई हैं। इस कारण मेरा नाम बीपीएल सूची से बाहर हो गया है। अब मैंने इसकी शिकायत दी है ताकि मेरा नाम दोबारा से बीपीएल सूची में आ सके। -सुनीता,जटिया मोहल्ला, बहादुरगढ़।
कुछ तकनीकी कारणों की वजह से मेरी फैमिली आईडी में 8 प्रापर्टी आईडी दर्ज हो गई हैं। अब उसे ठीक कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रही हूं। इस कारण मेरा गरीबी वाला राशन कार्ड भी कट गया है। -सुमित्रा, बहादुरगढ़।
मैं मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण कर रहा हूं। किराये पर रहता हूं। अब सरकारी सिस्टम की लापरवाही के कारण एक नहीं बल्कि 8 प्लाटों की प्रापर्टी आईडी मेरे नाम पर दर्ज हो गई हैं। मेरा राशन कार्ड भी इसी वजह से कट गया है। -सुनील, श्रमिक, बहादुरगढ़।
सेल्फ सर्टिफिकेशन के दौरान संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह गलती हुई है। जैसे-जैसे लोगों की शिकायतें आ रही हैं, उसकी जांच करवाकर प्रापर्टी आईडी का डाटा दुरुस्त किया जा रहा है। -संजय रोहिल्ला, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, बहादुरगढ़।