बहादुरगढ़। मुंडका-बहादुरगढ़ मेट्रो लाइन के पिल्लर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर टीकरी बॉर्डर-बहादुरगढ़ में पड़ाव डाले बैठे किसानों के अस्थाई पते बन गए हैं। पिल्लर नंबर की जानकारी मिलने पर सैकड़ों मील दूर से भी आंदोलनकारी परेशानी के बिना ही अपने साथियों के ठिकाने पर पहुंच जाते हैं, अन्यथा एक-दूसरे को ढूंढना मुश्किल हो सकता है।
बहादुरगढ़-मुंडका एलिवेटिड मेट्रो लाइन के बहादुरगढ़ में 150 पिल्लर हैं। इनमें टीकरी बॉर्डर स्थित पिल्लर नंबर 763 से 840 तक और डिपो की लिंक लाइन के भी कई पिल्लर भी आंदोलकारियों के अस्थाई पते बन गए हैं। इन पिल्लर नंबरों का किसान अपनी सुविधा के लिए एड्रेस के रूप में खूब उपयोग कर रहे हैं। इन पिल्लरों के पास ही किसान भोजन बनाते हैं और तंबू की तरह तैयार की गई अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में रहते हैं।
बहादुरगढ़ पड़ाव में किसानों को दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कोई कमी नहीं रहती। आंदोलन में दैनिक उपयोग की सभी वस्तुएं आसानी से उपलब्ध रहती हैं। हरियाणा के किसान भी खुले दिल से सहयोग कर रहे हैं। पंजाब के मोगा जिले के निवासी हरविंदर सिंह ने बताया कि यहां मेरा एंड्रायड मोबाइल फोन खराब हो गया तो मैंने साथी परमजीत सिंह के फोन से डायल करके पंजाब में अपनी पत्नी दिलजीत कौर को बताया। पत्नी और बेटी का भी आंदोलन में शामिल होने का मन था। बेटी नेे उनसे पता पूछा तो उन्होंने बहादुरगढ़ में मेट्रो पिल्लर नंबर 778 पर पहुंचने को कहा। घर में प्रयोग होने वाले मोबाइल फोन लेकर अगले दिन दोनों आसानी से हमारे ठिकाने पर पहुंच गई।
कोई किसान वापस अपने घर जाना चाहे तो आंदोलन में उसकी कमी पूरी करने के लिए पहले ही दूसरे किसानों को बुलाया जाता है। बहादुरगढ़ में मेट्रो पिल्लर नंबर 782 पर मानसा के गांव भागसर, कोटली और ढिकाना के रॉबिन बराड़, हनी सिंह, गुरचरण, नवी सिंह और अन्य किसान ठहरे हैं। मानसा के दर्शन सिंह ने बताया कि वे 25 नवंबर को अपने गांव से चले थे और 26 को यहां पहुंच गए। उनके गांव से कुछ दूसरे किसान और आए तो उन्होंने उनको अपने पिल्लर नंबर 782 का पता बताया।
जिला फतेहाबाद के गांव हसंगा के निवासी मांगेराम और उनके गांव से आए अन्य किसानों का ठिकाना पिल्लर-785 है।
पंजाब के जिला बरनाला के गांव कर्मगढ़ के 35 किसान 26 दिसंबर को यहां आए थे, वे पिल्लर 787-88 पर ठहरे हैं। इनमें शामिल हरभजन सिंह ने बताया कि टीकरी बॉर्डर-बहादुरगढ़ में आंदोलन का पड़ाव हाइवे पर 15 किलोमीटर से भी ज्यादा जगह में है। हमारे सैकड़ों आदमी ठहरे हैं। एक-दूसरे से मिलने के लिए इतने बड़े मेले जैसे इलाके में एक दूसरे को ढूंढना बड़ा मुश्किल है। आसानी से ढूंढने के लिए मोबाइल फोन से काल कर पिल्लर नंबर बता देते हैं।
जींद जिले के गांव संगतपुरा और ईटल खुर्द के किसान पिल्लर नंबर 806, फतेहाबाद के गांव बोड़ा के 807, नरवाना के बेलरखां निवासी विक्रम गोयत, बबली प्रधान, परमजीत, सतीश, दीपक और सुरेंद्र 809-10, सिरसा जिले के गांव मल्लेकां के किसान 810, ऐलनाबाद के मिठनपुरा व खारी सुरेरां के किसान सुनील और उनके साथी 811, नरवाना के गांव ढाणी टेक सिंह के 812, सिरसा जिले के घुकांवाली के 813 और किसान सेवा संगम से जुड़े फतेहाबाद जिले के गांव भोड़िया खेड़ा निवासी किसानों के अस्थायी निवास पिलर नंबर 817 हैं।