लोहड़ी शब्द में ल का मतलब लकड़ी, ओह से गोहा यानी जलते हुए सूखे उपले और ड़ी का मतलब रेवड़ी से होता है, इसलिए इस पर्व को लोहड़ी कहा जाता है। लोहड़ी के बाद मौसम में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है और ठंडक का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है।
झज्जर में लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। पर्व को बाजारों में चहल-पहल दिखी। लोग लोहड़ी पर्व को लेकर रेवड़ी, गज्जक, मूंगफली की खरीददारी करते हुए नजर आए। वहीं लोगों ने पर्व को देखते हुए नए कपडे़ डाले और शाम को लोहड़ी जलाकर एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी। लोगों ने अग्नि के इर्द-गिर्द परिक्रमा की और अग्नि में गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, गजक, पॉपकॉर्न आदि अर्पित किए।
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इसके बाद लोगों ने डीजे व ढोल की थाप पर नृत्य भी किया। लोहड़ी शब्द में ल का मतलब लकड़ी, ओह से गोहा यानी जलते हुए सूखे उपले और ड़ी का मतलब रेवड़ी से होता है, इसलिए इस पर्व को लोहड़ी कहा जाता है। लोहड़ी के बाद मौसम में परिवर्तन होना शुरू हो जाता है और ठंडक का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है। वहीं पर्व के चलते बाजार में जाम की स्थिति भी बनी रही।
खूब हुई पतंगबाजी
लोहड़ी के पर्व पर खूब पतंगबाजी भी हुई। पूरे आसमान में पतंग ही पतंग नजर आई। युवा टोली पतंगबाजी करते हुए दिखी। युवा एक-दूसरे की पतंग काटकर काफी खुश नजर आए। पूरे आसमान में शनिवार को पतंग ही पतंग नजर आई।