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लॉकडाउन : बहादुरगढ़ से मजदूरों का पैदल पलायन लगातार जारी

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बहादुरगढ़ से रेलवे ट्रैक के जरिये अपने घरों की ओर पलायन करते मजदूर] महिलाएं व अन्य। - फोटो : Bahadurgarh
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शनिवार को संपूर्ण लॉकडाउन का चौथा दिन रहा। बहादुरगढ़ से मजदूरों का पैदल पलायन लगातार जारी है। लोग सैकड़ों किलोमीटर पैदल मार्च करने को मजबूर हैं। वह भी सड़क के जरिये नहीं बल्कि रेलवे ट्रैक के साथ। शनिवार को रेलवे रोड से काफी संख्या में मजदूर अपने घरों की तरफ जाते नजर आए। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी करके मजदूरों की मदद करने का निर्देश दिया है।
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कोरोना से जंग के लिए जब से सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान क्या किया, तभी से पलायन का दौर शुरू हो गया। बहादुरगढ़ से दिन-रात मजदूर लोग अपने घरों की ओर कूच कर रहे हैं। किसी के कंधे पर बैग का बोझ है तो कोई अपने बच्चों को कंधे पर बिठाए हुए हैं। महिलाएं भी पीछे नहीं हैं वो भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।
कब पहुंच पाएंगे इन्हें भी नहीं मालूम
बहादुरगढ़ में काम करने वाले अधिकतर मजदूर निकल पड़े हैं, ऐसे लंबे सफर पर जहां कब पहुंच पाएंगे ये इन्हें भी नहीं मालूम। इनमें कई ऐसे भी हैं जिनके पेट में अन्न का एक भी दाना नहीं है। घर जाने में एक फैक्टरी वर्कर गणेश भी है। पांच साल की बेटी को कंधे पर बिठाकर अपने गांव इटावा पैदल ही निकल पड़ा है। बहादुरगढ़ के आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र की जिस फैक्टरी में गणेश काम करता था वह लॉकडाउन के कारण बंद है। इसी तरह एक वर्कर संतोष है जो बहादुरगढ़ से रेलवे ट्रैक के साथ-साथ अपने घर झांसी जा रहा है। बहादुरगढ़ से झांसी लगभग 500 किलोमीटर दूर है ऐसे में संतोष पैदल कब तक पहुंचेगा। उसे भी इस बारे में नहीं पता। संतोष के साथ उसकी पत्नी और बच्चे भी हैं।
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सबकी अपनी-अपनी समस्याएं
शहर के आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र में वर्कर रजनीश ऑटोमोबाइल की कंपनी में काम करता था, लेकिन अब उसके ऊपर संकट खड़ा हो गया है कि अब ऐसी स्थिति में वो करे तो क्या करे। सड़क पर जितने लोग गुजर रहे हैं उनकी उतनी ही दर्द भरी कहानियां हैं। खास बात यह है कि इन मजदूरों के साथ न केवल उनकी पत्नियां बल्कि छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं। वह कब तक पैदल चलेंगे। इसका भी उन्हें कोई ख्याल नहीं है। सरकार की ओर से मजदूरों की मदद करने के लिए हेल्प लाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
बहादुरगढ़ में मजदूरों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। जो लोग अपने प्रदेश जा रहे हैं उनसे शेल्टर होम में रहने के लिए कहा जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर शेल्टर होम बनाए गए हैं। साथ ही सरकार की ओर से दिए गए आदेशों की पालना की जा रही है। मजदूरों के खाने और पीने की व्यवस्था के साथ-साथ रात को रुकने के भी इंतजाम किए जा रहे हैं।
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- तरुण पावरिया, एसडीएम, बहादुरगढ़।

बहादुरगढ़ रेलवे रोड से स्टेशन की तरफ जाते मजदूर।- फोटो : Bahadurgarh

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