बादली। दादा सारंग देव मंदिर के नींव समारोह में धार्मिक माहौल के साथ हंसी-मजाक और अपनापन भी देखने को मिला। मंच से डॉ. अरविंद शर्मा, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने अपने अंदाज में लोगों से संवाद किया। उनकी बातों पर पंडाल में कई बार ठहाके गूंजे और तालियां बजती रहीं।
मंदिर की नींव रखते हुए डॉ. अरविंद शर्मा ने 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि टिकट मिलने के बाद उनकी माता ने सबसे पहले बादली स्थित दादा सारंग देव मंदिर में माथा टेकने की बात कही थी। वह चुनाव से पहले मंदिर पहुंचे और चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। वहीं, 2024 में टिकट मिलने के बाद मंदिर पहुंचने में देरी हुई और चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा।
यह बात सुनकर पंडाल में मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने कहा कि अपने आराध्य देव को कभी नहीं भूलना चाहिए और सबसे पहले उनके चरणों में अपनी कामना रखनी चाहिए। सरपंच आनंद गुलिया के आग्रह पर डॉ. शर्मा ने सावन माह पर आधारित रागिनी भी सुनाई। उन्होंने कहा कि वह कलाकार नहीं हैं, लेकिन विभिन्न कार्यक्रमों में उनसे रागिनी या कविता सुनाने का आग्रह किया जाता है। इसके बाद उन्होंने रागिनी प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि उनके भाई की शादी गुलिया गोत्र में हुई है, इसलिए बादली से उनका पारिवारिक रिश्ता है। बुजुर्गों ने उन्हें मान स्वरूप पैसे दिए तो उन्होंने पैर छूकर आशीर्वाद लिया। वहीं, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने चुटीले अंदाज में कहा कि फिलहाल वह सरकार का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए महिपाल ढांडा को साथ लाए हैं, ताकि वे क्षेत्र के लिए कुछ देकर जाएं। उन्होंने अपनी चाची का रिश्ता बादली से बताते हुए खुद को गांव का भांजा भी बताया।