मजदूर कल्याण मंच ने सरकार द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम, कारखाना अधिनयम और ठेका श्रम अधिनियम में किए गए संशोधन पर असंतोष जाहिर किया है। मंच ने इसे मजदूर विरोधी और मालिक हितैैैषी बताया है।
बृहस्पतिवार को मंच के स्थानीय कार्यालय में कार्यकर्ताओं की मीटिंग हुई।
इस मीटिंग में मजदूरों के हितों को उठाया गया। प्रधान मनीष कुमार ने कहा कि ठेका श्रम अधिनियम, कारखाना अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन करके सरकार ने साबित कर दिया है कि वह पूंजीपति वर्ग की हिमायती है। इन संशोधनों से मालिकों को मजदूरों का शोषण करने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा।
जिस फैक्टरी में 300 मजदूर काम करते हैं, उस फैक्टरी को बंद करने में अब सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। ठेके पर रखने की संख्या का प्रावधान भी 20 से 50 कर दिया गया है। 12-12 घंटे काम कराकर भी सात हजार रुपये वेतन मिलता है। बैठक में ठेकेदारी प्रथा बंद कराने, न्यूनत्तम वेतन 18 हजार रुपये करने, कच्चे मजदूरों को पक्का करने, पीएफ, इएसआई संबंधी तमाम सुविधाएं दिलाने की मांग उठाई गई। बैठक में सचिव लालजी, सतीश, रणबीर, रामचेत, राम बड़ई, सीताराम, शिवप्रसाद, रामनारायण, दयानंद और मनोज आदि भी मौजूद थे।