बिजली के जीरो कट के लिए प्रसिद्ध हुआ प्रदेश का पहला गांव बाढ़सा एक बार फिर निगम की सुर्खियों में हैं। मगर इस बार सराहनीय कार्य व नई योजना के लिए नहीं, बल्कि निगम की डिफाल्टर की लिस्ट में नंबर-1 होने के लिए। गांव के कुल उपभोक्ताओं में से 20 प्रतिशत उपभोक्ताओं पर करीब एक करोड़ रुपये के बिल बकाया हैं। निगम बार-बार बिल भरने की अपील कर चुका है मगर डिफाल्टरों के कानों तक जूं तक नहीं रेंग रही। सूची लंबी होती जा रही है।
150 बड़े डिफाल्टर
प्रदेश के गांव बाढ़सा में 24 घंटे बिजली देने की शुरुआत पूर्व सरकार ने करीब चार साल पहले की थी। इस योजना के तहत ग्रामीणों को घरों से बाहर खंभों पर मीटर लगवाने थे। ग्रामीणों ने योजना में सहयोग देते हुए घरों के बाहर मीटर लगवा भी लिए और निगम की ओर से गांव में जीरो कट पर बिजली सप्लाई की सुविधा मिल गई। शुरू में ग्रामीणों ने योजना की जमकर सराहना की। निगम की योजना का लाभ भी उठाया। मगर अब पिछले एक वर्ष से गांव के करीब 150 उपभोक्ताओं ने बिल भरने बंद कर दिए। इनकी तरफ निगम का बकाया करीब एक करोड़ रुपये हो गया है।
निगम के आकड़ों के अनुसार जिन उपभोक्ताओं पर 50 हजार रुपये से ज्यादा का बिल बकाया है उनका जोड़ 66 लाख 60 हजार 993 रुपये बनता है। इसके अतिरिक्त सैकड़ों छोटे-छोटे डिफाल्टर भी हैं। इनका बकाया मिलाकर करीब एक करोड़ रुपये बनता है। इसलिए निगम ने अब बिजली के बिल न भरने वाले डिफाल्टर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटकर वसूली करने पर काम शुरू किया है।
उपभोक्ताओं की शिकायत
बिल न भरने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर पुराने हो चुके हैं। कई बार घरों में बिजली का प्रयोग नहीं होता तब भी मीटर चलते रहते हैं। इसलिए बिल भरना मुश्किल हो रहा है। निगम को मीटरों की जांच करानी चाहिए और खराब मीटर हटा नए मीटर लगाने चाहिए।
गांव की उपयोगिता
झज्जर जिले का बाढ़सा गांव दिल्ली और गुड़गांव सीमा से सटा है। यहां एम्स-2 की ओपीडी चलती है। कैंसर इंस्टीट्यूट की आधारशिला भी रखी जा चुकी है। अब भी सैकड़ों एकड़ जमीन पंचायत के पास है। इन सब को देखते हुए करीब 3 साल पहले तत्कालीन सरकार ने 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की योजना की शुरुआत बाढ़सा गांव से की थी।
क्या कहते हैं अधिकारी
बाढ़सा में काफी उपभोक्ताओं की ओर बिजली का काफी पैसा बकाया है। अब वसूली के लिए पहले बड़े डिफाल्टरों के कनेक्शन काटे जाएंगे। अगर ग्रामीण सहयोग करेंगे तो निगम बेहतर सेवा देता रहेगा।
- खूबचंद, एसडीई, यूएचबीवीएन, बादली