नवरात्र के दिनों में माता भीमेश्वरी देवी के ऐतिहासिक मंदिर में माथा टेकने व मन्नत मांगने वाले श्रद्वालुओं की भीड़ उमड़ रही है। अल सुबह से ही दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ मां के दरबार में आने लगती है। घंटों लाइन में लगने के बाद मां के दर्शन करके पुण्य कमाते हैं। शनिवार को भी भक्तों का रेला दिखा। कस्बे में भक्तों की चहल-पहल से चारों और माहौल धार्मिक बना हुआ है। बता दें कि सप्तमी व अष्टमी के दिनों भक्तों का यह सैलाब अपने चरम पर होगा।
माता भीमेश्वरी देवी मंदिर का मुख्य मेला सप्तमी और अष्टमी के दिन लगता है। प्रशासन भी मेले की तैयारियों पर विशेष ध्यान दे रहा है। ताकि भक्तों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उल्लेखनीय है कि हर छठे महीने नवरात्र के दौरान यहां भारी मेले का आयोजन किया जाता है और साथ ही गधों व घोड़ों का विश्व प्रसिद्ध मेला भी लगता है। पूरे कस्बे के चारों तरफ चहल-पहल शुरू हो गई है। दूर-दूर राज्यों व शहरों से भक्तजन माता के दर्शन करने के लिए मंदिर में आने शुरू हो गए हैं।
एसडीएम ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
मेले के इंचार्ज एसडीएम अजय चोपड़ा ने मंदिर परिसर निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान मेले में ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा अधिकारियों व भवन में ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों को कड़े निर्देश दिए कि मेले में किसी भी प्रकार दिक्कत श्रद्घालुओं को न हो। मेले में डीएसपी जगत सिंह, तहसीलदार कनब सिंह, नायब तहसीलदार राजबीर कौशिक, नगर पालिका सचिव सुमनलत्ता, चौकी इंचार्ज मुकेश कुमार, पालिका जेई अनिल कुमार, पालिका एमई, भवन निरीक्षक कमलदीप खत्री, आदि अधिकारी मेले में व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला परिसर में मौजूद रहे।
कलकत्ता से तैयार कराई गई है मां की पोशाक
मंदिर के पुजारी पुरुषोत्तम वशिष्ट ने बताया कि कलकत्ता में कारीगरों से मां की नौ दिनों की पोशाक सच्चे गोटे से तैयार करवाई है। नवरात्रों में मां का खास श्रंगार होता है। मां की प्रतिमा का सुबह व शाम को अलग-अलग मंदिर में श्रंगार होता है।
रिटायर्ड कर्मचारी भी सेवा
बेरी मेले में ड्यूटी कर चुके कर्मचारियों को धर्मनगरी बेरी में ऐसा मोह हो जाता है कि तबादला होने व रिटायर्ड होने के बाद बेरी मेले में सेवा करने आते है। बेरी नगर पालिका सचिव रणबीर शर्मा सचिव पद से भले ही सेवानिवृत हो गए है, लेकिन भंडारे में अब भी हर छठे माह आते है। अब मां के दरबार में भंडारे लगवाने वाले श्रद्घालुओं की होड़ लगी रहती है।