बिजली निगम के 23 सब डिवीजनों के निजीकरण करने व प्रस्तावित हड़ताल को रोकने के लिए एस्मा लगाए जाने के विरोध में निगम कर्मियों में सरकार के प्रति रोष है। सोमवार को ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने शहर में मशाल जुलूस निकाल और नारेबाजी की। ज्वाइंट एक्शन कमेटी से जुड़े पदाधिकारी बंशीलाल, जयकंवार छिक्कारा, बिजेंद्र फोगाट, बिजेंद्र सैनी, प्रदीप, रवींद्र, सुखबीर, बलवंत यादव समेत कई अन्य ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन 23 सब डिवीजनों को प्राइवेट किया गया है उसके बाद से ही निगम पर घाटे का बोझ काफी बढ़ गया है। कर्मचारी जो कि अनुबंध व दूसरी आधारों पर कार्य कर रहे थे उन पर बेरोजगारी की मार पड़ रही है। सरकार हठधर्मिता पर अड़ी है। पिछले काफी दिनों से बिजली कर्मियों का धरना, प्रदर्शन व क्रमिक अनशन जारी है। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन उसके बाद भी उनके हितों को लेकर ध्यान नहीं दिया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने वार्ता के जरिये अपना जनविरोधी फैसला वापस नहीं लिया तो उनकी दो दिवसीय प्रस्तावित हड़ताल 29 व 30 जून को हर हाल में होगी। इसको लेकर वे पीछे हटने वाले नहीं।
एस्मा को बताया काला कानून
बिजली कर्मियों ने कहा कि सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। जब वे अपने हकों की लड़ाई के लिए आवाज उठा रहे हैं तो उसको रोकने के लिए एस्मा लगा दिया गया है। लेकिन वे इससे घबराने वाले नहीं है। कर्मचारियों ने एस्मा को काला कानून की संज्ञा दी है।
पुलिस ने रखी नजर
पार्क में एकत्रित होने से लेकर मशाल जुलूस तक पुलिस व खुफिया विभाग ने अपनी नजर बनाए रखी। प्रदर्शन के दौरान किस तरह के हालात हैं इसको लेकर पूरा ध्यान रखा। मशाल जुलूस के आगे एक पीसीआर तो पीछे थाना शहर प्रबंधक की गाड़ी रही। हालांकि रोड पर किसी भी तरह का कोई व्यवधान जुलूस प्रदर्शन के दौरान नहीं दिखा।