दिल्ली में प्रदूषण व वाहनों की भीड़ कम करने के लिए शुरू की गई ऑड-ईवन नंबर कार संचलन योजना का दूसरा चरण शुक्रवार 15 अप्रैल से शुरू हो गया। पहले दिन ईवन नंबर की गाड़ियां चलाने पर रोक रही। दूसरे दिन शनिवार को ऑड नंबर की कारें चलाने पर रोक रहेगी। इसी तरह यह चलन 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। दिल्ली सरकार द्वारा महीनों तक व्यापक प्रचार के बावजूद सैकड़ों लोग आज अपनी ईवन नंबर की कारें लेकर घरों से निकल पड़े। दिल्ली की बहादुरगढ़ से लगती सभी सीमाओं पर भी अनेक कार चालकों और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों में बहस हुई। जिससे योजना को लागू करने में कठिनाई हुई।
उल्लंघन पर देने पड़े 2000 रुपये
बहादुरगढ़ से दो प्रमुख सीमाओं के रास्ते दिल्ली में हर रोज करीब 30 हजार गाड़ियों का आवागमन होता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए शुक्रवार को दिल्ली में पेट्रोल या डीजल इंजन वाली ऑड नंबर कारें ही चल सकती थीं। यानी वही कारें जिनके नंबर का अंतिम अंक 1, 3, 5, 7 या 9 हो। यह योजना लागू होने से शुक्रवार को बहादुरगढ़ के रास्ते भी खाली दिखे। जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। वहीं नियम का उल्लंघन कर चलने वाली इवन नंबर की प्रत्येक कार चालक का 2000 रुपये का चालान किया गया। झाड़ोदा बार्डर पर शाम छह बजे तक 100 से ज्यादा लोगों को यह दंड भुगतना पड़ा। जबकि टीकरी बार्डर पर धड़ाधड़ चालान कटे। अभियान के दूसरे दिन शनिवार 16 अप्रैल को सम नंबर की गाड़ियां ही चल पाएंगी। यानी गाड़ी के नंबर का अंतिम अंक 2, 4, 6, 8 या 0 होना चाहिए। अभियान में सीएनजी चालित वाहनों को छूट दी गई है।
चालान कटा तो बड़बड़ाते गए नेताजी
अनेक ईवन नंबर कार चालक परिवहन विभाग की टीम की आंखों में धूल झोंक कर दिल्ली से निकल हरियाणा में प्रवेश कर गए और अनेक हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश कर गए। खुद को एक बड़ी कंपनी का अधिकारी बताने वाले एक कार चालक ने परिवहन विभाग के कर्मचारी को फर्जी डीएल थमा दिया। वह डीएल को चेक करने लगा तो वह व्यक्ति गाड़ी को भगा ले गया। सफेद खादी पहने एक नेताजी ईवन नंबर कार से दिल्ली जाना चाहते थे। लेकिन कर्मचारी नहीं माने और चालान काटकर थमा दिया। नेताजी को बड़बड़ाते निकल जाना पड़ा।
बार्डर से लौटी ईवन नंबर कारें
दिल्ली, गुड़गांव, फरीदाबाद या नोएडा आदि स्थानों को जाने के लिए आई, ईवन नंबर वाली अनेक गाड़ियां दिल्ली की सीमाओं से लौट गई। लौटने वाले बहादुरगढ़ के निवासी तो गाड़ी को अपने घर खड़ी करके बस से निकल गए। गुडग़ांव या फरीदाबाद जाने वालों ने वाया बादली का रास्ता चुना, जो 10-12 किलोमीटर ज्यादा हो गया। फरीदाबाद के निवासी गिरधारी लाल ईवन नंबर वाली अपनी कार में चंडीगढ़ से आए थे। सोनीपत जिले से लगते सिंघू बार्डर के रास्ते दिल्ली होकर फरीदाबाद जाना उनके लिए बेहतर था। लेकिन 2000 रुपये के चालान से बचने के लिए वह दिल्ली के बाहर-बाहर से बहादुरगढ़ पहुंच गए। यहां से झाड़ोदा बार्डर के रास्ते फरीदाबाद जाने की कोशिश की तो सफल नहीं हुए। आखिर बादली का रास्ता चुना।
टीम की लापरवाही का उठाया फायदा
परिवहन विभाग के दस्ते की महिला कर्मचारियों ने नियम का पालन न करने वालों के साथ गांधीगीरी भी की। चालकों को समझाया और उन्हें गुलाब का फूल भेंटकर प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग मांगा। सीमाओं पर तैनात परिवहन विभाग की मदद दिल्ली नागरिक सुरक्षा के जवान और दिल्ली पुलिस कर रही थी। लेकिन इस पूरी टीम की लापरवाही का भी ईवन नंबर वाहन चालकों को खूब फायदा उठाया। दोपहर करीब एक बजे जब टीम के सदस्य लंच करने निकल गए तो करीब 2 बजे तक इवन नंबर वालों ने इस मौके का जमकर लाभ उठाया।