मणिपुर आतंकी हमले में शहीद हुए 31 वर्षीय मेजर अमित देशवाल के लिए लोगों की आंखें नम होने के साथ साथ अमर शहीद की शहादत पर गर्व भी है। देश की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ते हुए जान का बलिदान देने वाले शहीद अमित की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। अमित के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर शुक्रवार को गांव सुरेहती में राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी जाएगी। अमित के परिजनों का कहना है कि हमें ऐसे और बेटों की जरूरत है जो देश के लिए अपनी जान देकर सवा करोड़ भारतीयों की रक्षा करने से पीछे नहीं हटते।
मणिपुर में उग्रवादी संगठन एनएससीएन और जेडयूएएफ के खिलाफ देश की रक्षा के लिए चलाए जा रहे एक विशेष ऑपरेशन से जुड़े सुरेहती के रणबांकुरे मेजर अमित देशवाल ने आतंकियों से लड़ते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी। शहीद का पार्थिव शरीर शुक्रवार को शहीद के गांव लाया जाएगा। मेजर अमित देशवाल ने ऑपरेशन को पूरा करने के लिए अपनी जान लगा दी और आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को भी मार गिराया। लेकिन शाम को आतंकियों से दोबारा हुई मुठभेड़ में आतंकियों द्वारा चलाई गई दो गोलियां रणबांकुरे मेजर अमित देशवाल के सीने के पार हो गईं। घायल अमित को अस्पताल लाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
नहीं थम रहे मां के आंसू
बेटे की मौत की खबर सुनते ही शहीद की मां बेदवती की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बार बार बेटे की याद में बेसुध होकर गिर रही मां को एक तरफ तो बेटे के शहीद होने पर गर्व है। लेकिन उसकी यादों को वो भुला नहीं पा रही। शहीद अमित के भाई अंकित ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके बड़े भाई ने देश के लिए लड़ते हुए अपनी जान दी। परिजनों का कहना था कि अमित हमेशा से पढ़ाई में अच्छा था और देशसेवा के लिए सेना में जाना चाहता था।
आर्मी डे को हुआ था जन्म
शहीद मेजर अमित देशवाल का जन्म 15 जनवरी 1985 को गांव सुरेहती में हुआ था। इत्तफाकन इसी दिन आर्मी दिवस भी मनाया जाता है। 5वीं तक की पढ़ाई गांव में ही पूरी करने के बाद कक्षा 6 से 8वीं तक की पढ़ाई अंबाला में अपनी मौसी के घर पूरी की। 9वीं से 12वीं की पढ़ाई के लिए केंद्रीय विद्यालय प्रथम नासिक में भेजा गया। इनके पिता ऋषिराम देशवाल की पोस्टिंग भी नासिक में ही थी। गुरु गोविंद सिंह कॉलेज दिल्ली से सन् 2004 में बीए की पढ़ाई पूरी की।
बेहतरीन खिलाड़ी भी
शहीद के भाई अंकित ने बताया कि अमित 1 जनवरी 2005 को डेढ़ साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 10 जून 2006 को ऑल इंडिया सीडीएस कमीशन में लेफ्टिनेंट पद से भर्ती हुए। वर्ष 2008 में कैप्टन के पद पर उन्हें प्रमोट कर दिया गया। कई जानलेवा अभियानों में सफलता प्राप्त करते हुए मिशन को पूरा करने पर करीब 4 साल बाद वर्ष 2012 में उन्होंने फौज में रहते हुए मेजर पद की बागडोर संभाली। अंकित का कहना था कि अमित एक बेहतरीन खिलाड़ी भी था, जो कि इंटर यूनिवर्सिटी वॉलीबाल प्रतियोगिता में भी भाग ले चुका था।
मिले सम्मान
शहीद अमित द्वारा कई खतरनाक ऑपरेशनों में विजयी होने के बाद उनको स्पेशल फोर्स के लिए चुना गया। वर्ष 2016 में उन्होंने इलाइट सर्विस ज्वाइन की और घातक नामक ऑपरेशन के दौरान डैगर बेस्ट स्टूडेंट का सम्मान भी दिया गया।
तीन साल का है बेटा
11 मई 2009 को अमित नीता के साथ शादी के बंधन में बंधे। उनका करीब तीन साल का बेटा है। वह अपने बेटे और पत्नी नीता के साथ हाल में असम के जोहराट में रह रहे थे। उनके परिजन झज्जर शहर के सेक्टर 6 में रहते हैं।
ये बोले लोग
घर के गमगीन माहौल में परिजनों के साथ-साथ उनके गांव वालों को उनके बचपन से जुड़े किस्सों के बारे में आपस में बात करते देखा गया। स्थानीय निवासी संत सुरेहती ने कहा कि अमित को उनकी अनुकरणीय वीरता के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमित बचपन से ही बहादुर और सबके साथ मेल मिलाप के साथ रहने वाला लड़का था।