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Jhajjar-Bahadurgarh News: सेना की नर्सरी बना झज्जर, दो विक्टोरिया क्रॉस भी मिले

Thu, 15 Jan 2026 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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14jjrp17- झज्जर। गांव उखलचना कोट निवासी लेफ्टिनेंट निशु परिवार के साथ। स्रोत- परिवार
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झज्जर। हरियाणा को सैनिकों का प्रदेश कहा जाता है, देश में हर दसवां सैनिक हरियाणा से ही है। इसमें भी जिला झज्जर सेना की नर्सरी के रूप में मशहूर है। मिलिट्री हो या पैरा मिलिट्री, ऐसी कोई भर्ती नहीं जहां झज्जर के युवाओं की भागीदारी न हो।
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झज्जर के सैनिकों का देश सेवा का जुनून देखते ही बनता हैं। इस समय जिले में 47 हजार से ज्यादा पूर्व सैनिक हैं और लगभग इतने ही विभिन्न सेना में कार्यरत भी हैं। जिले के दो वीर सपूतों, रिसालदार बदलू सिंह (प्रथम विश्व युद्ध) और कैप्टन उमराव सिंह (द्वितीय विश्व युद्ध) को विक्टोरिया क्रॉ से सम्मानित किया गया था।
इससे झज्जर भारत का एकमात्र जिला बन गया, जहां दो सैनिकों को यह सर्वोच्च वीरता सम्मान मिला। रिसालदार बदलू सिंह का जन्म ढाकला गांव में हुआ था और कैप्टन उमराव सिंह का संबंध पलड़ा गांव से है।
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तीसरी पीढ़ी कर रही देश सेवा



गांव उखलचना कोट की लेफ्टिनेंट निशु फसलवाल अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो भारतीय सेना में सेवाएं देंगी। लेफ्टिनेंट निशु फसलवाल ने सेना के सबसे बड़े आर्मी हॉस्पिटल आर एंड आर दिल्ली कैंट से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद लेफ्टिनेंट के पद के लिए शपथ ली थी। तीन पीढ़ी से देश सेवा का जज्बा दादा कैप्टन दिलपत सिंह, पिता सूबेदार विनोद कुमार से मिला। बचपन से निशु को सेना की वर्दी का शौक था। निशु ने अपने दादा कैप्टन दिलपत सिंह, ताऊ सूबेदार राकेश कुमार और पिता सूबेदार विनोद कुमार की तरह आर्मी ज्वाइन की। निशु के दादा, ताऊ और पिता आर्मी में मेडिकल कोर में थे। अब निशु भी नर्सिंग सर्विस के जरिये सेना में लेफ्टिनेंट बनीं हैं।


सिलानी निवासी जगबीर सिंह शौर्य चक्र से सम्मानित

गांव सिलानी केशो निवासी जगबीर सिंह को 15 अगस्त 2005 को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। वह 6 अक्टूबर 1980 को सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। उसके बाद 2008 में कैप्टन के पद से सेवनिवृत हुए। जगबीर सिंह ने बताया कि उनकी पलटन जम्मू कश्मीर के बांदीपूरा में थी और कंपनी को बूट गांव में लगाया गया था। 6 मई 2004 को ऑपरेशन काला पत्थर शुरू किया गया। बांदीपूरा में घने जंगल और बर्फीबारी थी। वहां उग्रवादी होने की सूचना पर सर्च अभियान चलाया गया। हाई डाउट मिलने पर उन्होंने ग्रेनड डाला। मौके पर दो उग्रवादी मारे गए। दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। लगभग दो घंटे की फायरिंग में चार और उग्रवादी मारे गए। फायरिंग बंद होने पर सर्च किया तो उग्रवादियों के पास काफी सामान मिला था। इस पर उनको 2024 में शौर्य चक्र के लिए नामित किया गया और 15 अगस्त 2005 में सम्मानित किया गया।

मिले सम्मान

विकटोरिया क्रॉस-2

महावीर चक्र-6
वीर चक्र-13

कीर्ति चक्र -3
मैंशन ऑफ डिस्पैच-17
उत्तम युद्ध सेवा मेडल-2

शौर्य चक्र-10

युद्ध सेना मेडल-4
सेना मेडल-68

वायु सेना मेडल-4

14jjrp17- झज्जर। गांव उखलचना कोट निवासी लेफ्टिनेंट निशु परिवार के साथ। स्रोत- परिवार

14jjrp17- झज्जर। गांव उखलचना कोट निवासी लेफ्टिनेंट निशु परिवार के साथ। स्रोत- परिवार

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