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भगवान ने दिया, सरकार ने नहीं लिया, क्या करें किसान

Tue, 18 Oct 2016 01:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
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किसान - फोटो : bureau
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सरकार एक एकड़ की फरद पर सिर्फ 4 क्विंटल बाजरे की खरीद कर रही है। ऐसे में बची हुई फसल को हम कहां ले जाएं। कई वर्षों बाद तो ऊपर वाले की मेहरबानी से बढ़िया फसल हुई है। लेकिन सरकार अब खरीद नहीं रही है। चाहे कुछ भी क्यों न हो, पीसता तो बेचारा किसान ही है। यह कहना है स्थानीय अनाज मंडी में अपना बाजारा बेचने आए किसानों का। किसानों का कहना है कि भले ही सरकार ने अब दो दिन का समय बढ़ा भी दिया हो, लेकिन पूरा बाजरा तो नहीं खरीद रहे हैं। ऐसे में किसान ओने-पौने दामों में आढ़तियों को बेचने को मजबूर हैं। दूसरी ओर जितनी फसल की खरीद हुई है। उनका भुगतान भी नहीं हो पाया है। जिसके चलते भी परेशानी हो रही है।
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जिले की तीन मंडियों में की जा रही है खरीद
जिले भर में तीन मंडियों से ही बाजरे की खरीद की जा रही है। जिनमें से झज्जर मंडी के अलावा, ढाकला व मातनहेल की मंडियों से बाजरे की खरीद की जा रही है। ढाकला और मातनहेल की मंडियों में खरीद पूरी की जा चुकी है, जबकि झज्जर मंडी में मंगलवार यानी आज भी बाजरे की खरीद होगी।

कितनी हो चुकी है खरीद
ढाकला मंडी में एक हजार 88 मीट्रिक टन, मातनहेल मंडी में एक हजार 63 मीट्रिक टन खरीद हुई है। जबकि झज्जर मंडी में सोमवार तक 2803 मीट्रिक टने बाजरे की खरीद की जा चुकी है, जबकि एक दिन अभी शेष बचा है।
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3500 मीट्रिक टन बाजरे का हुआ उठान
तीनों मंडियों में से उठान का कार्य भी किया जा रहा है। अभी तक करीब 3500 मीट्रिक टन बाजरे का उठान हो चुका है। जबकि करीब 1400 मीट्रिक टन बाजरा अभी भी मंडियों में पड़ा हुआ है।


क्या कहते हैं किसान
किसान रविन्द्र ने बताया कि सरकार की ओर से इस बार रखी गई शर्तों के कारण बाजरे को मंडियों तक लाने में काफी परेशानी हुई है। कई किसानों को शर्तें पूरी न होने के कारण बाजरे को प्राईवेट दाम पर आढ़तियों को बेचना पड़ा है। जहां सरकारी खरीद 1330 रुपये प्रति क्विंटल की है वहीं प्राईवेट दामों 1260 के हिसाब से बेचना पड़ा है।


किसान ओम गहलोत ने बताया कि सरकार किसानों का शोषण कर रही है। जो शर्त रखी है उसमें से आधे बाजरे की ही खरीद हुई है। ऐसे में आधा बाजरा कहां ले जाए। जिसके चलते परेशानी हो रही है।


किसान प्रहलाद सिंह ने बताया कि कभी सरकार मारती है और कभी भगवान। अबकि बार अच्छी फसल हुई तो सरकार द्वारा आधी फसल को ही खरीदा। अब बाकि बची फसल को आढ़तियों को ही बेचना पड़ रहा है। जिसके चलते आढ़ती मन मानी कर रहे है।


सरकार द्वारा लगाई गई शर्तें व नियम के आधार पर ही बाजरे की खरीद का कार्य किया जा रहा है। साथ- साथ उठान भी किया जा रहा है। हैफेड  एजेंसी की ओर से अभी तक दो करोड़ 72 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
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एसके चौधरी, डीएम हैफेड
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