भाई शुरू मैं डीसी, एडीसी तो कई बै गाम म्हं आ लईयै, पर दीपेंद्र हुड्डा नै म्हारी कोई चिंता कोन्या। पहलया तो गाम म्ह चौथे दिन चक्कर काटैया करदे। जब तै गाम गोद ले राख्या सै, तब तै दो साला म्ह सिर्फ तीन बै ही आए हैं। जब बोट्यां की जरूरत होवै सै, जब महीने म्ह पांच चक्कर काट्या कर दे। ईब चुनावी मतलब बंद हौतये ही सांसद का गाम म्ह आणा भी बंद हो गया। गाम गोद तो ले लिया पर पालेगा कौन, गाम म्ह न पाणी, न साफ-सफाई। बस कतई ए जीना मुश्किल हो रहैया सै और कहण म्ह आवै सै के गाम दीपेंद्र ने गोद ले राख्या सै। यह कहना है गांव छुछकवास (इस्लामगढ़) के निवासियों का। ग्रामीणों का यह आरोप है। गांव में जहां पानी की निकासी नहीं है, वहीं सड़कें टूटी पड़ी हैं। गांव के जोहड़ और तालाब गंदगी से अटे पड़े हैं और बिजली के तार भी जर्जर अवस्था में हैं। गांव की बरसों पुरानी बाईपास की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। आलम यह है कि गांव के मेन चौराहे पर जाम की समस्या बनी रहती है। स्थिति यह बन गई है कि गांव की पीएचसी और स्कूलों में भी स्टाफ पूरा नहीं है, जिसके चलते ग्रामीण परेशान हैं।
बोले ग्रामीण सच्चाई कुछ और
कहने को गांव छुछकवास (इस्लामगढ़ ) आदर्श गांव है। प्रधानमंत्री सांसद आदर्श गांव योजना के तहत गांव को सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने गोद लिया हुआ है, लेकिन यह कागजों तक ही सीमित है, धरातल पर सच्चाई कुछ और है। गांव में न तो पानी निकासी की सुविधा है और न ही पीने के पानी की। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का बुरा हाल है और कोई सुुध लेने वाला नहीं है, जबकि गांव का सरपंच भी गांव की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आदर्श गांव जैसी कोई बात नहीं है। गांव में हर ओर समस्याओं का अंबार है। वहीं गांव में विकास कार्यों को लेकर सांसद दीपेंद्र हुड्डा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
यह कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीण गोबिंद का कहना है कि सांसद आदर्श गांव योजना के तहत जब दीपेंद्र हुड्डा ने गांव को गोद लिया, तब ग्रामीणों को बहुत उम्मीद थी कि गांव का विकास होगा, लेकिन दो साल में दीपेंद्र सिर्फ तीन बार ही गांव में पहुंचे, लेकिन कोई काम नहीं करवाया। गांव की सभी समस्याएं ज्यों की त्यों हैं। गांव की सबसे पुरानी मांग बाईपास की है, लेकिन अभी तक बाईपास का निर्माण नहीं करवाया गया है। ग्रामीणों को प्रतिदिन जाम की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है।
पूर्व मेंबर जय सिंह का कहना है कि गांव में डीसी, एडीसी तो बहुत बार आए, लेकिन सांसद एक या दो बार तो आए। गांव में कोई विकास कार्य नहीं करवाया। उन्होंने बताया कि गांव की सड़कें टूटी हुई हैं और पानी की निकासी नहीं है। गांव में पीने के पानी की समस्या का भी समाधान नहीं हो पाया है।
गांववासी सतीश ने बताया कि गांव में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। बिजली के तार जर्जर हैं और गांव के पीएचसी और स्कूलों में भी स्टाफ पूरा नहीं है। गांव में समस्याएं ही समस्याएं हैं लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।
ग्रामीण संजय ने बताया कि गांव की सबसे मेन समस्या गंदे पानी की निकासी की है। सभी जोहड़ और तालाब गंदगी से अटे पड़े हैं। कोई सुध लेने वाला नहीं है। गांव में पीने के पानी की समस्या भी है। उन्होंने बताया गांव की सड़कें भी टूटी हुई हैं।
गांव में कोई विकास कार्य नहीं कराया है। इस बात को लेकर दो बार सांसद दीपेंद्र से मुलाकात भी की है, लेकिन आश्वासन ही मिला है, कोई समाधान नहीं किया है। दो वर्षों में सिर्फ दो या तीन बार ही सांसद गांव में पहुंचे हैं।
महाबीर, सरंपच गांव छुछकवास (इस्लामगढ़ )