शहर व क्षेत्र के गांवों में लोगों को बुधवार को भी पिछले दिनों की तरह पुराने नोट बदलने और पुराने नोटों में अपनी राशि जमा कराने में भारी समस्या का सामना करना पड़ा। कुछ बैंकों के बाहर तो लोग सुबह से लाइनों में लग गए। बैंक खुलने पर कर्मचारियों ने आगे से नए नोट नहीं आने की समस्या बताई तो लाइनों में लगे लोग हताश होकर घर लौट गए। बैंकों द्वारा लाकर सी करने की अफवाह भी शहर में रही।
कई बैंकों में नहीं आई करेंसी
बुधवार को शहर के तीन दर्जन से अधिक बैंकों में से आधा दर्ज बैंकों में करेंसी नहीं आई। जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। आधे से ज्यादा एटीएम भी खाली ही थे। सिर्फ रेलवे रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा, आईसीआईसीआई बैंक, विजया बैंक और बैंक आफ आंध्र ने ही लोगों को नोट बदलकर दिए। इसके बावजूद एसबीआई के बाहर सुबह से शाम तक सैकड़ों लोगों की भीड़ लगी रही। लाइनों में लगे अनेक लोगों ने बैंक कर्मचारियों द्वारा नोट बदलने व जमा करने में हेराफेरी करने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि बैंक वाले चुपके-चुपके अपने परिचितों को करेंसी बदलकर दे रहे हैं। जबकि सुबह आकर कई-कई घंटों से लाइनों में लगे लोग वंचित रह जाते हैं।
अफवाह से मचा हड़कंप
शहर में बुधवार को बैंकों के लाकर सी करने की अफवाह उड़ती रही। जिससे लाकर धारक अनेक लोगों में हड़कंप मच गया और वे अपनी बैंक शाखाओं की ओर दौड़ पड़े। इससे बैंकों में भीड़ बढ़ गई। कई बैंक कर्मियों से ग्राहकों की बहस हुई। बैंक वालों के जवाब से वे मुश्किल से संतुष्ट हुए। सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के प्रबंधक प्रशांत प्रकाश ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। किसी लाकर को सील नहीं किया गया है। उन्होंने अनुरोध किया कि वह व्यक्ति बैंक आए जिसको बैंक से काम है। अन्यथा भीड़ बढ़ती है और ग्राहकों के काम होने में बाधा आती है।
डीएसपी ने किया आगाह
कई दिन से सोशल मीडिया में चल रहे एक मैसेज को पढ़कर बुधवार को अनेक लोग डीएसपी आफिस पहुंच गए। उन्होंने डीएसपी के समक्ष बैंक मैनेजर के नाम दरखास्त पेश की। इस दरखास्त पर बैंक से पुरानी करेंसी के बदले पांच लाख रुपये की नई करेंसी दिलाने अथवा उनके खाते से पांच लाख रुपये निकलवाने की सिफारिश करने की मांग की। डीएसपी धीरज कुमार ने इस तरह की कोई व्यवस्था होने से इंकार कर दिया। उन्होंने इस मैसेज में गलत बताया। कहा कि बैंकों ने इस तरह का कोई प्रावधान होने से साफ इंकार किया है।
मुफ्त पिलाई चाय
बैंकों के पास भीड़ रहने से खाने-पीने की चीजें बेचने वालों की चांदी हो रही है। सभी बैंकों के पास दर्जनों रेहड़ियां लग जाती हैं। फलों की बिक्री भी हो रही है। घंटों लाइनों में खड़े लोगों को इन दुकानों से कुछ खरीद कर खाना पड़ता है। मगर लाइनों में खड़े रहकर थक गए लोगों की मदद करने में भी कुछ लोग पीछे नहीं हटे। एसबीआई के निकट कुछ लोगों ने बैंक की लाइन में लगे लोगों को दिनभर मुफ्त चाय पिलाई।
लोगों को मिले सिर्फ दो-दो हजार
गांव मांडोठी में ग्रामीण बैंक की शाखा के आगे लोगों की घंटों लाइन लगी रही। पैसे नहीं मिलने के कारण काफी लोगों को बैंक से खाली हाथ लौटना पड़ा। गांव के निवासी टैणी प्रधान ने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी पुराने नोट बदलवाने के लिए बैंकों में नए नोटों की कमी नहीं होने का दावा करते हैं, मगर मांडोठी गांव के ग्रामीण बैंक में सोमवार को भी करंसी नहीं आने के कारण लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। अपने खाते से 24 हजार रुपये तक मिलने का दावा भी गलत साबित हुआ।