शारीरिक रूप से दिव्यांग होते हुए सफलता पाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। पिछले पैरा ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धाओं में हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया था। जिले के माछरौली गांव के 32 वर्षीय रामपाल चाहर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अब टोक्यो में होने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों के ओलंपिक के लिए चयन होने के बाद उन पर सभी की निगाहें हैं। पिछले कई वर्ष से निरंतर अभ्यास में जुटे रहने वाले खिलाड़ी रामपाल एथलीट में हाई जंप मुकाबले में उतरते हैं और इस खेल में उन्हें अपनी श्रेणी में विश्व में छठा रैंक प्राप्त है। अब टोक्यो पैरा ओलंपिक के लिए चुने जाने पर हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह ने उन्हें अपना बधाई संदेश भेजा है।
वर्ष 2018 में एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने पर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी थी। वर्ष 2018 में नेशनल पैरा गेम्स जो पंचकुला में हुए थे उनमें रामपाल ने गोल्ड मेडल जीतकर अपने प्रदेश का नाम रोशन किया था। इसके एक साल बाद बंगलूरू में हुई नेशनल चैंपियनशिप में रामपाल ने सिल्वर के साथ प्रदेश का नाम रोशन किया।
रामपाल जब केवल चार वर्ष की आयु के थे कृषि यंत्र से उनका एक दायें हाथ का हिस्सा कट गया था। कृषि परिवार से संबंध रखने वाले रामपाल ने खेलों में अपनी रुचि बनाई और स्कूल के बाद कॉलेज में खेलना जारी रखा। उसने हाई जंप प्रशिक्षण प्राप्त किया और हमेशा उनके साथ कम्पीटिशन किया जो खिलाड़ी स्वस्थ थे। बाद में पॉलिटेक्नीक डिप्लोमा किया ताकि वे अपने खेल को शिक्षा के साथ जारी रखे। स्नातक, बीएड व बीलिब की डिग्री हासिल करने वाले रामपाल 2018 में उन्होंने केंद्र सरकार में आयकर विभाग में जॉब मिली। इसी वर्ष 2021 में हरियाणा सरकार में उन्हें खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के लिए चुना है। इन दिनों रामपाल अपने नेशनल कोच डॉ. सत्यपाल के मार्ग दर्शन में कड़ा अभ्यास कर रहा है। रामपाल का कहना है कि मेडल जीतना ही उनका लक्ष्य है। इस बार पैरा ओलंपिक से पदक लाने के लिए वह जीतोड़ मेहनत कर रहा है।