झज्जर। बहादुरगढ़ कस्बे के 6 गांव और कुछ शहरी हिस्से के 11 साल से जमाबंदी हो पा रही है। इस कारण लोगों को संपत्ति बेचने, लोन लेने के लिए पुराने रिकॉर्ड को निकालवाकर काम करना पड़ता है। पुरानी जमाबंदी निकलवाने के लिए लोगों को ज्यादा राशि खर्च करनी पड़ती है, लेकिन इस तरफ स्थानीय प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। लोग बार-बार जमाबंदी की मांग कर चुके हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है।
शुक्रवार को जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय में जांच पड़ताल के बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम के संज्ञान में यह मामला आया। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते में शामिल निरीक्षक रामनिवास ने बताया कि बहादुरगढ़ तहसील के गांव परनाला की साल 2011-12, गांव हसनपुर की 2012-13, बहादुरगढ़ की 2014-15, गांव परनाला व बराही की 2016-17, बहादुरगढ़, छारा, मांडौठी की 2019-20, गांव परनाला व बराही की 2021-22 व हसनपुर गांव की 2022-23 की जमाबंदी लंबित है।
कर्मियों की लापरवाही, इंतकाल अटके
जिले में 15214 इंतकाल दर्ज नहीं मिले। इस कारण लोगों को परेशानी हो रही है। झज्जर में 3518, बेरी में 2019, बादली में 2732, मातनहेल तहसील में 1610, साल्हावास में 167, बहादुरगढ़ में 5168 इंतकाल दर्ज नहीं मिले। यह खुलासा सीएम फ्लाइंग की रेड के दौरान हुआ है। सीएम फ्लाइंग ने इसमें डीआईओ कार्यालय के कर्मियों की लापरवाही उजागर करते हुए कार्रवाई के लिए मुख्यालय को लिख दिया है।
46 में से केवल 14 प्रॉपर्टी डीलरों के लाइसेंस वैध मिले
उडनदस्ते के टीम सदस्य ने बताया कि जिले में इस समय केवल 14 प्रॉपर्टी डीलरों के पास ही लाइसेंस है जबकि जिले में 46 प्रॉपर्टी डीलर है। इस साल अब तक केवल 14 ने ही अपना लाइसेंस रिन्यू करवाया है जबकि बाकी ने लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाए हैं।