सांपला में खापों की रैली को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। माना जा रहा था कि यह रैली प्रदेश के एक दूसरे जिले में हुई खापों की रैली से तगड़ी होगी। लेकिन रैली में खाप चौधरियों के हाथ से कमान छूट गई और मोर्चा युवाओं ने संभाल लिया।
रैली में शामिल बुजुर्गों की मानें तो दीनबंधु छोटूराम की जन्मभूमि में यूं तो कई रैली हुई हैं, लेकिन आरक्षण को लेकर खापों की इतनी बड़ी रैली पहली बार हुई है। इस रैली के माध्यम से खापों के साथ-साथ युवाओं ने भी अपनी ताकत का अहसास सरकार को करा दिया।
जानकारों का कहना है कि सांपला की धरती पर कभी छोटूराम ने ही इस स्तर पर किसानों के लिए बड़ा आंदोलन किया था, लेकिन उसके बाद यहां केवल प्रदर्शन ही होते रहे। अब रविवार को जाट युवा आरक्षण की मांग पर सड़क पर उतर आए और बड़े आंदोलन की हुंकार भर दी।
पुलिस-प्रशासन की लापरवाही से लगा जाम मय्यड़ में हुए आंदोलन के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने सांपला की रैली को गंभीरता से नहीं लिया। यही कारण रहा कि युवाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग को अपने कब्जे में ले लिया। यदि पुलिस-प्रशासन सचेत होता तो शायद हाइवे जाम नहीं होता।
जाम के दौरान भी पुलिस-प्रशासन की लापरवाही साफ दिखाई दी। सांपला चौराहे से पहले से ओवरब्रिज के पास तो भारी पुलिस बल खड़ा रहा, लेकिन चौराहे के पास चंद पुलिसकर्मी ही नजर आए। हालात यह थे कि युवाओं ने किसी भी वाहन को इधर से उधर नहीं जाने दिया। इससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आरक्षण चाहिए, ब्रैकर नहीं बनवाना
हाइवे पर जाम लगाने के बाद कुछ बुजुर्गों ने मांग करते हुए कहा कि डीसी और एसपी मौके पर आएं और आश्वासन देकर जाम खुलवा लें। लेकिन युवाओं की फौज ने इस पर उन्हें बड़ा सटीक जवाब दिया। युवाओं ने एकजुट होकर कहा कि उन्हें कोई ब्रेकर नहीं बनवाना, आरक्षण चाहिए। आरक्षण डीसी और एसपी के बस की बात नहीं है। इसलिए डीसी और एसपी की बजाय किसी जाट मंत्री को मौके पर बुलाया जाए।
युवाओं ने मंच से दी पुलिस को खुली चेतावनी
जाम के दौरान कुछ पुलिसकर्मी पूरी मुस्तैदी के साथ खड़े थे। युवाओं ने माइक के माध्यम से पुलिस को खुली चेतावनी दे डाली। युवाओं ने कहा कि पुलिस यह न समझे कि जाट यहां खाली हाथ आए हैं। जाट हर स्थिति को समझ रहे हैं और हर व्यक्ति के पास हथियार है। इसलिए कोई भी गलती न की जाए।
कोई एक नहीं था नेतृत्व करने वाला
जाम के समय युवाओं का नेतृत्व करने वाला कोई नहीं था। युवाओं के इस कदम के बाद खाप प्रतिनिधि जाम में शामिल तो हुए, लेकिन उनके अंदर कोई उत्साह नहीं था। अधिकतर खाप नेता केवल नाम के लिए ही शामिल दिखाई दिए। सभी युवा खुद ही अपनी कमान संभाले हुए थे।
कभी माइक पर कोई संबोधित करता तो चंद मिनट बाद दूसरा युवक आकर माइक ले लेता। रैली के दौरान सरोहा खाप के प्रधान रणधीर सिंह, दहिया खाप के प्रधान सुरेंद्र दहिया, मलिक खाप के प्रधान बलजीत मलिक, कुलदीप मलिक, जाट धर्मशाला बहादुरगढ़ के प्रधान सज्जन सिंह दलाल, प्रोफेसर चरण सिंह, सतबीर गहलावत, राठी खाप के प्रधान तस्वीर राठी, हुड्डा खाप प्रधान धर्मपाल हुड्डा, दलाल खाप प्रधान भूप सिंह दलाल, दुल्हेड़ा बारह का प्रधान उमेद सिंह देशवाल, नांदल खाप प्रधान महेंद्र सिंह नांदल, महम चौबीसी के प्रधान तुलसी ग्रेवाल, आरक्षण संघर्ष समिति की महिला प्रधान विनोद बाला आदि मौजूद थे।