उद्यमियों और ट्रांसपोर्टरों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए कवायद तेज हो गई है। ट्रांसपोर्टरों ने इसके लिए कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से मदद मांगी हैं।
सोमवार को दि पब्लिक कैरियर ट्रक यूनियन में सभा का आयोजन किया जाएगा। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री का नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। विधायक नरेश कौशिक को भी आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम को विवाद सुलझाने का प्रयास माना जा रहा है।
बहादुरगढ़ में उद्यमियों और ट्रांस्पोर्टरों के बीच लंबे अरसे से विवाद चला आ रहा है। ट्रांसपोर्टर उद्यमियों पर यूनियन तोड़ने व बाहरी वाहनों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हैं तो उद्योगपति ट्रांसपोर्टरों पर मनमाना किराया वसूलने व अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हैं।
कुछ दिनों पहले इस विवाद ने हंगामे का रूप ले लिया था। ट्रांसपोर्टर सड़कों पर उतर आए थे। एसडीएम से आश्वासन मिलने के बाद ट्रांसपोर्टर शांत हो हुए, लेकिन यूनियन बचाए रखने का प्रयास ट्रांसपोर्टरों ने जारी रखा।
उन्होंने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से संपर्क किया और उनसे मिलने चंडीगढ़ गए। उसके बाद से मामला बिलकुल शांत है। विवाद को सुलझाने की कवायद शुरू हो गई है। इसी कड़ी में ट्रांसपोर्टरों की ओर से सोमवार को परनाला रोड स्थित दि पब्लिक कैरियर ट्रक यूनियन में आयोजित एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया है।
दि हनुमान टैंपो यूनियन के प्रधान महेश कौशिक ने बताया कि यह कार्यक्रम कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और विधायक नरेश कौशिक का अभिनंदन करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में ट्रांसपोर्टर मंत्री और विधायक से यूनियनें न तोड़ने व बाहरी वाहनों पर रोक लगाने की मांग करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि मंत्री व विधायक उनकी समस्या का समाधान कर देंगे। इस मौके पर रागिनी कंपीटीशन भी होगा। रमेश खरावड़िया सहित कई रागिनी गायक पहुंचेंगे।
उद्यमियों और ट्रांसपोर्टरों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बीच अब एक और ट्रांसपोर्ट यूनियन बन गई है। नई बनी डिब्बा बंद ट्रक यूनियन को मिलाकर अब बहादुरगढ़ में कुल 15 यूनियनें हो गई हैं।
गत 23 जून को ही इस यूनियन का उद्घाटन हुआ था। गांव रोहद में खुली बॉडीबंद ट्रकों की इस यूनियन को दि शिव ट्रबो बंद डिब्बा ट्रक यूनियन नाम दिया गया है।
नई यूनियन बनाने को उद्यमी-ट्रांसपोर्टर विवाद सुलझाने की कवायद माना जा रहा है। दरअसल, यहां पहले बंद बॉडी वाले बड़े वाहन नहीं थे। उद्यमी कहते थे कि खुली गाड़ियों में उनका माल खराब हो जाता है। अब बंद बॉडी ट्रक यूनियन भी खुल गई है।