बहादुरगढ़। अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर क्षेत्र के किसान प्रतिनिधि मंडल और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच वीरवार को चंडीगढ़ में हुई बातचीत बेनतीजा रही। बाद में किसानों के नेता रमेश दलाल ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। शुक्रवार को गांव आसौदा में पंचायत करके मामले में अगली रणनीति तय की जाएगी।
कुंडली-मानसेर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस वे के साथ-साथ हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर बनाने के लिए जिन गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई है। वह किसान 172 दिन से केएमपी के मांडोठी टोल प्लाजा के पास धरना दे रहे हैं। किसान अपनी जमीन का मुआवजा कलेक्टर रेट से चार गुणा देने समेत कई तरह की मांगें कर रहे हैं। मांगपत्र में कुल 25 मांग शामिल हैं। रमेश दलाल ने फोन पर बातचीत में सीएम से हुई चर्चा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव उमाशंकर ने बातचीत की। किसानों की ओर से उनके समक्ष सारी मांगें लिखित में रखी गई। कानून में मुआवजा बढ़ाने संंबंधी प्रावधान भी बताए, लेकिन उमाशंकर ने मांगों को कानून विरुद्ध बताया। बाद में मुख्यमंत्री किसानों के बीच आए और उमाशंकर के बताए अनुसार मांगों को कानून विरुद्ध बताते हुए मानने से इंकार कर दिया। अन्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत का दलाल ने कोई विवरण नहीं दिया। यह जरूर कहा कि मुख्यमंत्री तो उमाशंकर की रबड़ स्टैंप हैं। वह केवल वही करते हैं जो उनको अधिकारी कहते हैं।
रमेश दलाल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिले किसानों के नौ सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल में गांव आसौदा के पंडित अतर सिंह, रिवाड़ी खेड़ा मंदिर कमेटी के प्रधान दयानंद, गांव बुपनियां के चन्दराम, मांडोठी के दिलबाग सिंह, दहिया खाप के जय प्रकाश दहिया व गांव मेहंदीपुर के सतपाल भी शामिल थे।
मुख्यमंत्री द्वारा मांगें मानने से इंकार करने के बाद किसानों के अगले कदम के बार में पूछने पर रमेश दलाल ने कहा कि शुक्रवार को दादा बूढ़ा मंदिर परिसर में पंचायत होगी। इस पंचायत में वह किसानों को मुख्यमंत्री से बातचीत के परिणाम की जानकारी देंगे। इसके बाद चर्चा कर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी, लेकिन आंदोलन तेज होगा।