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Jhajjar-Bahadurgarh News: बच्चों के बढ़ते मोटापे को देखते हुए आंगनबाड़ी रेसिपी में बदलाव

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फोटो नंबर 71: देवरखाना गांव की आंगनबाड़ी केंद्र में मौसमी अनाज से बनी रेसिपी लेते बच्चे। संवाद
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बादली। बच्चों में बढ़ते मोटापे को देखते हुए आंगनबाड़ी की रेसिपी में बदलाव किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की सलाह पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बच्चों को शुरू से ही नमक और चीनी का प्रयोग कम करने पर जोर दिया है। आंगनबाड़ी केंद्र में दिए जा रहे खाद्य पदार्थों में चीनी नमक और वसा को कम कर दिया गया है।
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वहीं दालें (चना), फल और घर के बने कम तेल वाले स्नैक्स (जैसे उबले हुए स्नैक्स) को शामिल करने का सुझाव भी दिया गया है। साथ ही स्थानीय और मौसमी अनाज (जैसे रागी, बाजरा) से बने पौष्टिक मिक्स को बढ़ावा दिया है ताकि बच्चों को स्वस्थ और संतुलित आहार मिले।
स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों बच्चों को मीठे पेय पदार्थों और मीठे स्नैक्स को कम देने का सुझाव दिया था। इसके पीछे का कारण बच्चों में बढ़ रहा मोटापा बताया और सुझाव दिया कि भोजन में नमक का उपयोग भी संतुलित मात्रा में हो।
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से सीडीपीओ प्रियंका ने बताया कि सप्ताह में हर दिन अलग-अलग डाइट दी जाती है। सर्दी को देखते हुए जनवरी माह में तले हुए और चीनी वाले स्नैक्स की जगह पंजीरी, पुलाव और नमकीन दलिया दिया जाने लगा है।
वर्जन
मोटापा एक बीमारी है जोकि अनियमित आहार के कारण बढ़ रही है। प्रमुख तौर पर मीठा और ज्यादा नमक खाने से मोटापा बढ़ता है। बच्चों को शुरू से ही पुष्टाहार में रागी, बाजरा और अन्य स्थानीय अनाज शामिल करना चाहिए। पालक, आलू, मटर जैसी मौसमी सब्जियों और दालों (मसूर दाल, दाल पालक) को आहार का हिस्सा बनाएं। बच्चों को खेलने और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि मोबाइल और स्क्रीन टाइम बढ़ने से भी मोटापा बढ़ रहा है।
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-डॉ. संदीप कुमार, सीएचसी बादली।
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