इंटरनेट से कनेक्टिविटी टूटने के चलते मंगलवार को बैंकों में एचटेट के चालान काटने का काम पूरी तरह प्रभावित रहा। चालान कटवाने की अंतिम तिथि होने के कारण भारी संख्या में युवा चालान कटवाने के लिए बैंकों में पहुंचे हुए थे।
मगर इंटरनेट से क्नेक्टिविटी नहीं होने के कारण चालान नहीं कट पा रहे थे। इससे गुस्साए युवाओं ने एचडीएफसी बैंक परिसर में हंगामा कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख बैंक प्रबंधन को पुलिस बुलानी पड़ी।
पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्थित पर काबू पाया। दोपहर 2 बजे के बाद कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद चालान काटे जा सके। मगर आवेदकों की संख्या काफी ज्यादा होने के कारण सभी के चालान नहीं कट पाए।
हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आवेदन करने का मंगलवार का मंगलवार को अंतिम दिन था। आवेदन के लिए फीस का चालान एचडीएफसी, यूनियन बैंक व ओबीसी बैंक में ही काटे जा रहे थे।
मगर मंगलवार को तकनीकी दिक्कत के कारण इंटरनेट से इनकी कनेक्टिविटी टूट गई। इसी कारण आवेदनकर्ता एक बैंक से दूसरे मं चक्कर लगा रहे थे। मगर हर बैंक में यही हाल था। इससे गुस्साए युवाओं ने सुबह 11 बजे एचडीएफसी बैंक में हंगामा कर दिया। मामला बिगड़ता देख बैंक प्रबंधन ने कंट्रोल रूम में फोन किया।
सूचना मिलते ही सिटी चौकी प्रभारी अत्तर सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने गुस्साई भीड़ को काबू किया तथा उन्हें समझा-बुझा कर शांत किया।
एचडीएफसी बैंक की झज्जर शाखा के मैनेजर संदीप ने बताया कि इंटरनेट की केबल कटने के कारण इंटरनेट से कनेक्टिविटी टूट गई है। ऐसा शहर के लगभग सभी बैंकों के साथ हो रहा है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर बीएसएनएल की केबल कटी रहती है। यह समस्या हर महीने में तीन से चार बार जरूर होती है। चालान शाम 6 बजे तक जमा किए जा रहे हैं। दोपहर बाद इंटरनेट से कनेक्टिविटी हो गई थी, उसके बाद चालान काटने का काम सुचारू रूप से शुरू हो गया था।
चालान नहीं कटने के कारण युवा काफी परेशान दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि अगर उनका चालान नहीं कटा तो वे पात्रता परीक्षा नहीं दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि सुबह 9 बजे से ही वे लाइन में लगे थे, मगर बैंक में चालान नहीं कट रहे हैं।
खुड्डन निवासी ताराचंद ने बताया कि वह अपनी बेटी पूजा का चालान कटवाने के लिए आया था। मगर काफी देर इंतजार करने के बावजूद चालान नहीं कट पाया।
गांव गुढ़ा निवासी प्रदीप ने बताया कि वह चालान कटवाने के लिए एक बैंक से दूसरे का चक्कर लगा रहा है। मगर कहीं पर भी चालान नहीं कट रहे हैं।