बहादुरगढ़। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी छठ पूजा की तैयारियां लोगों ने कर दी है। बाजार में दुकानें सज गईं हैं। लेकिन छठ पूजा के लिए मुख्य स्थल घाट की हालत दयनीय है।
घाट की साफ-सफाई नहीं है। इससे पूर्वांचल समाज के लोगों में स्थानीय प्रशासन के प्रति नाराजगी बनी हुई है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि वे पूजा कहां करेंगे।
राष्ट्रीय पूर्वांचल परिवार और बाबा महेंद्र नाथ पूजा दुर्गा पूजा समिति अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा ने नगर परिषद व सिंचाई विभाग से घाट में सुविधाएं देने की मांग की है ताकि लोगों की आस्था को ठेस न पहुंचे।
समिति अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा, कृष्ण मिश्रा, संजीव कुमार, सतेंद्र सिंह व अशोक मिश्रा ने कहा कि छठ महापर्व पूर्वांचल के लोगों का मुख्य त्योहार है।
इससे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। बहादुरगढ़ में महावीर पार्क के पास नहर पर छठ पूजा के लिए स्थाई घाट है, लेकिन इस घाट में सफाई नहीं कराई गई है। इससे घाट में काफी गंदगी हो गई है। बहादुरगढ़ में पूर्वांचल के 70 हजार से अधिक लोग रहते हैं और इस पूजा घाट पर हर साल पूर्वांचल मूल के 10 हजार से अधिक लोग छठ पूजा के लिए आते हैं।
यह पर्व चार दिन 25 से 28 अक्तूबर तक चलेगा। शाम के समय बड़ी संख्या में महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचेंगी, लेकिन सही व्यवस्था न होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
इसलिए उनकी नगर परिषद व सिंचाई विभाग के मांग है कि छठ पूजा के लिए लोगों को पर्व मनाने के लिए सुचारू व्यवस्था की जाए।
अर्घ्य में यह करते अर्पित : संध्या अर्घ्य में बांस की टोकरी में फल-फूल, ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना, मूली व कंदमूल रखकर सूर्य देवता को जल अर्पित किया जाता है।
इसके साथ ही छठ मैया को छह फल संतरा नींबू, गन्ना, सिंघाड़ा, नारियल, केला बहुत प्रिय है। परिवार के सभी किसी नदी, तालाब या घाट पर एकत्र होकर एक साथ सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
-फोटो 54 : महाबीर पार्क के पास छठ पूजा घाट पर पड़ी गंदगी। संवाद- फोटो : संवाद