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दिनोंदिन अवैध तरीके से स्थापित हो रहे हॉट मिक्स प्लांट्स

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गुभाना गांव में एक हॉट मिक्स प्लांट्स लगाने की तैयारी। - फोटो : Bahadurgarh
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बादली। दिल्ली सहित अन्य क्षेत्रों में सड़कें बनाने के लिए गुभाना और बादली में धड़ल्लेे से अवैध हॉट मिक्स प्लांट्स स्थापित हो रहे हैं। पर्यावरण को प्रदूषित करने में एमएम प्लांट्स कोई कमी नहीं छोड़ रहे। एनजीटी के नियमों को भी ताक पर रखा जाता है। कहीं विस्तारीकरण के नाम पर अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की अवहेलना हो रही है तो कहीं चोरी चुपके नए प्लांट्स लगाए जा रहे हैं।
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एचएम प्लांट्स स्थापित करने का कारोबार गांव गुभाना और सोलधा के साथ-साथ बादली शहर में देखा जा रहा है। जहां न तो नियमों की पालना होती है और न ही लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखा जाता है। नियमों के नाम पर आंखों में धूल झोंकने के लिए नई तकनीक लगाने का सहारा लिया जाता है, जबकि प्रदूषण फैलाने की सभी खामियां पहले की तरह ही होती हैं। कुछ ग्रामीणों ने पिछले दिनों प्रदूषण बोर्ड से शिकायत भी की लेकिन अभी तक बोर्ड की ओर से कार्रवाई नहीं करने का कारण समझ से दूर है। सबसे ज्यादा प्लांट्स गुभाना-दिल्ली रोड पर हैं। इस इलाके में अवैध हॉट मिक्स प्लांट्स का अवैध जाल बन चुका है। रातभर प्लांट्स चलाए जाते हैं, जिससे होने वाली परेशानी का आकलन भी नहीं लगाया जा सकता। इन प्लांट्स में रोड़ी, बजरी और तारकोल मिलाकर सड़कें बनाने की सामग्री तैयार की जाती है।
दो माह में आधा दर्जन नए प्लांट्स
पिछले दो माह की बात की जाए तो आधा दर्जन नए प्लांट्स स्थापित हो चुके हैं। जबकि प्रदूषण बोर्ड को कानों-कान खबर नहीं है। विभाग की मानी जाए तो एक साल से किसी नए प्लांट की अनुमति नहीं दी गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस प्रकार से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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कहां क्या नुकसान
नुकसान का आकलन किया जाए तो सबसे बड़ा नुकसान आसपास के किसानों को होता है। जो अपने ही खेतों में कार्य नहीं कर सकते। प्रदूषण और धूल के चलते फसल खराब होती है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। प्लांट्स से निकले धुएं के गुब्बार गांवों में उड़ते हैं। अवैध प्लांट्स से पर्यावरण को नुकसान के साथ ही राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है। सरकार को प्रति माह लाखों रुपये का चूना लगाने वाले प्लांट्स पर विभागीय कार्रवाई भी कभी नहीं की गई।
कई गांवों में लग गए हैं प्लांट
गुभाना गांव की बात की जाए तो करीब 12 साल पहले दिल्ली में एचएम सीलिंग होने पर गुभाना में पांच प्लांट्स लगे थे। पुराने प्लांट्स अब बड़े और आधुनिक प्लांट्स में तब्दील हो चुके हैं। जबकि धीरे-धीरे 15 हॉटमिक्स प्लांट्स स्थापित हो हुए हैं। पिछले दो माह में 6-7 प्लांट्स नए लगे गए हैं। इसके अतिरिक्त सोलधा में तीन और बादली में दो प्लांट्स हैं। लोहट गांव के प्लांट्स पर कुछ साल पहले विभाग की ओर से सील लगाई गई थी।
तकनीक के नाम पर क्षमता बढ़ाना गलत
प्रदूषण बोर्ड क्षेत्र में एनजीटी नियमों की पालना करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। एक साल से किसी भी नए प्लांट को मंजूरी नहीं दी गई है। अवहेलना करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। तकनीकी अपडेट के नाम पर क्षमता बढ़ाना गलत है। एचएम प्लांट्स के लिए मिनिस्ट्री ऑफ इंवायरनमेंट फोरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज की ओर जारी नोटिफिकेशन में इन प्लांट्स को नई तकनीक से काम करना होगा।
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-अमित दहिया, एसडीई प्रदूषण बोर्ड।
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