सिविल अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की इलाज प्रक्रिया सरल करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल टीम और मैनेजमेंट ने सभी विभागों के डॉक्टरों से मंथन कर प्रॉपर फॉर्मेट तैयार किया है।
यह सब क्वालिटी इंप्रूमेंट के लिए किया गया है। इससे न केवल पेशेंट की केयर आसान होगी, बल्कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को भी उसके इलाज के बारे में पूरे रिकॉर्ड का पता चल सकेगा। इसके लिए चार तरह की इनडोर फाइलें तैयार की गई हैं। अब इन्हीं फाइलों में मरीज के भर्ती होने से लेकर उसके डिस्चार्ज होने तक पूरा हवाला दर्ज रहेगा।
यहां के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कादियान और क्वालिटी कंट्रोल के इंचार्ज डॉ. वीरेंद्र अहलावत ने बताया कि अस्पताल में सर्जरी, स्त्री रोग, मेडिसन व कैजुअल्टी सहित अन्य विभागों के औसतन माहभर में 1100 से लेकर 1200 मरीज किसी न किसी बीमारी से पीड़ित होकर इलाज के लिए भर्ती होते हैं।
ऐसे में उनका पूरा रिकॉर्ड बेड हेड टिकट पर दर्ज होता था मगर अब हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने गुणवत्ता सुधार के तहत ट्रीटमेंट प्रक्रिया को सरल करने का प्रयास किया है, ताकि इससे मरीजों के साथ उनके तीमारदारों व डाक्टरों को भी किसी तरह से रिकॉर्ड के लाने व उसके जांचने में दिक्कत न उठानी पड़े। एसएमओ डॉ. मुकेश इंदौरा और आरएमओ डॉ. विनय देसवाल का कहना है कि इस नई व्यवस्था से काफी सुविधा मिलेगी। डॉक्टर और स्टाफ नर्स को भी मरीज की पूरी हिस्ट्री का पता चल सकेगा।
वार्डवाइज रहेंगी फाइलें
मरीजों को भर्ती होने के लिए फाइल बनवाने के लिए इधर-उधर जाना पड़ता था। इससे उन्हें परेशानी होती थी, लेकिन अब इस झंझट से राहत दिलाने के लिए अब हर वार्डवाइज एडमिट फाइलें होंगी। हर वार्ड की फाइल का कलर भी अलग होगा। गुलाबी रंग की फाइल स्त्री रोग विभाग की तो पीले रंग की की सर्जरी विभाग, हलके ग्रीन रंग की मेडिसन व सफेद रंग की कैजुअल्टी व शार्ट-स्टे एमएलसी केस से संबंधित बनेंगी।
दो भाषाओं में होगा मैटर
मरीज के इलाज से संबंधित जरूरी जानकारी, उसकी केस हिस्ट्री सहित अन्य जानकारी अंग्रेजी के साथ हिंदी भाषा में प्रिंट की हुई है। पहले वाली एडमिट फाइलें जो कि बेड हेड टिकट के नाम से जानी जाती थी, उनको मैनेजमेंट आज के हिसाब से ज्यादा सार्थक नहीं मानता था।
ऐसे में इसमें सुधार के लिए अब नया प्रारूप में एडमिट फाइलें तैयार की गई हैं। इन फाइलों में एडमिशन स्लिप भी लगेगी जो कि एक ही रंग की होगी। यही नहीं इसमें डॉक्टर की कंसर्ट के हिसाब से मरीज को खाने-पीने का क्या कुछ देना है, इसको लेकर डाइट फार्मा भी भरा जाएगा।
नई एडमिट फाइलों पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की अलख जगाने का स्लोगन भी अंकित किया हुआ है। यही नहीं एंबुलेंस सेवा के लिए भी 102 नंबर के बारे में प्रचार प्रसार किया गया है। स्लोगन के माध्यम से लोगों की बेटा-बेटी को लेकर मानसिकता बदलने पर भी पूरा जोर दिया गया है।