झज्जर। तीन दिन तक चलते नाटकीय घटनाक्रमों के बाद आखिरकार शुक्रवार को छात्र प्रियम की मौत का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। वहीं इस मामले में छह छात्रों को जूवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 5 छात्रों को बाल सुधार गृह हिसार भेज दिया गया तो एक छात्र को कोर्ट से जमानत मिल गई।
गौरतलब है कि सोमवार रात को जवाहर नवोदय विद्यालय के करोंथा गांव निवासी छात्र प्रियम की मौत हा गई थी। जिसे स्कूल प्रशासन ने छत से गिरने का मामला बताया था। बाद में सहयोगी छात्रों से पुलिस पूछताछ में पता चला था कि छात्र की मौत सड़क हादसे में हुई है, जिसे सहयोगी छात्रों ने भय के मारे छत से गिरने का मामला बनाने का प्रयास किया है। वहीं मामले का खुुलासा करते हुए डीएसपी राजीव ने शुक्रवार को बताया कि मामले में जांच के दौरान सामने आया है कि तीन छात्र स्कूल से बाहर खाना खाने के लिए रात के समय स्कूल से बाहर गए थे। जहां से लौटते समय छात्र प्रियम को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर में छात्र प्रियम गंभीर रूप से घायल हो गया तो दोनों छात्र घबरा गए। इन्होंने प्रियम को स्कूल में ले जाने के लिए चार अन्य छात्रों की मदद ली और स्कूल के अंदर छत से गिरने का मामला बना दिया। इसके बाद इन्होंने स्कूल प्रशासन को सूचित किया। इसी बीच करीब पौने घंटे का समय निकल गया। इसके चलते छात्र प्रियम की मौत हो गई। अगर समय ये लोग अस्पताल पहुंचा देते तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
6 को किया कोर्ट में पेश, 1 को मिली जमानत
पुलिस ने मामले में 6 छात्रों को आरोपी मानते हुए शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। जहां पर एक छात्र को जमानत मिल गई, वहीं बाकी 5 को बाल सुधार गृह हिसार भेज दिया गया। मामले में शामिल 5 छात्र नौंवी कक्षा से हैं तथा एक छात्र 11वीं कक्षा का छात्र है।
परिजन अब भी नहीं जांच से संतुष्ट
मृतक प्रियम के परिजन पुलिस जांच से अब भी संतुष्ट नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि अगर छात्र लापरवाही के लिए दोषी हैं तो स्कूूल प्रिंसिपल भी तो लापरवाह रहा है, आखिर उस पर कार्रवाई पुलिस के द्वारा क्यों नहीं की गई? वहीं परिजनों के ये भी सवाल हैं कि सड़क से लिए गए खून के नमूने की भी जांच नहीं आई है, ऐसे में कैसे पता चल गए वो प्रियम के थे या फिर किसी और के। परिजनों की मांग है कि प्रिंसिपल पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
वर्जन
मामले में 6 छात्रों को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से 5 को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। प्रिंसिपल पर कार्रवाई उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। विभाग उस पर कार्रवाई कर सकता है, जो कि बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम के द्वारा भी इसकी सिफारिश की जानी है।
राजीव, डीएसपी, झज्जर।