जाट आरक्षण के मामले को लेकर हुई प्रेस कांफ्रेंस में जाट संघर्ष समिति का नाम बदलकर जाट सद्भावना समिति किया गया है। इसके अध्यक्ष अशोक मलिक ने कहा कि एसी, बीसी के तहत आरक्षण देकर गरीबों को ऊपर उठाने के लिए सरकार द्वारा पिछले 60 सालों से प्रयत्न किया जा रहा है, लेकिन सरकार का मानना है कि आज भी उनकी हालत ऐसी नहीं बन पाई है, कि अब उनका आरक्षण समाप्त कर दिया जाए।
इसी कारण से पिछले 60 सालों में गरीबों की दशा में सुधार नहीं हो सका है। लगातार पिछड़ते जा रहे जाट समुदाय की हालत भी ऐसी हो गई तो उन्हें ऊपर उठाने के लिए सरकार को एक नये सिरे से प्रयत्न करना होगा। क्यों न सरकार पिछड़ते जा रहे जाट समुदाय को अभी से संभालने का काम करे, ताकि जाट समुदाय की हालत में अभी से सुधार करके उनकेे हालतों को दयनीय होने से बचाया जा सके।
उनका कहना था कि सरकार द्वारा किसी भी समुदाय की बिगड़ती हुई स्थिति को तुरंत प्रभाव से संभाल लेना चाहिए, क्योंकि अगर किसी बीमारी को तुरंत मुश्किल हो जाता है। समय रहते मर्ज को पकड़ लिया जाए तो उसका जल्द ही इलाज संभव हो जाता है। इसलिए उन्होंने प्रेस के माध्यम से सरकार तक ये बात पहुंचाने की कोशिश की है कि जाटों की लगातार दयनीय हो रही स्थिति को उनका हक देकर तुरंत सुधार करने की कोशिश की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाद अब केंद्र में आरक्षण पाने के लिए जंतर मंतर पर शांति पूर्वक धरने पर बैठा जाएगा या भूख हड़ताल की जाएगी। समिति सदस्यों ने प्रदेश भर में आपसी भाईचारे को बनाए रखने के लिए क्षेत्र के कुछ गांवों का दौरा भी किया। इस अवसर पर समिति संयोजक आजाद सिंह पवार, राज्य प्रधान राज सिंह बुपनिया, रविंद्र बुपनिया, भूप सिंह नंबरदार, प्रहलाद सिंह धनखड़ व देवी प्रधान पेलपा के अलावा अन्य सदस्य मौजूद रहे।
हमने किसी का हक नहीं छीना
इस संबंध में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में अगर बीसीबी व बीसी की जनसंख्या के हिसाब से आरक्षण का प्रतिशत निकाला जाए तो हमसे कहीं ज्यादा है, लेकिन इसके बावजूद भी हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय चाहे उसमें कोई भी जाती हो अगर उनकी हालत कमजोर है तो सरकार को उन्हें भी आरक्षण देने से गुरेज नहीं करना चाहिए।
निर्दोष को तंग नहीं करने दिया जाएगा
हिंसक घटनाओं में संलिप्त आरोपियों की गहनता से जांच की जाए किसी भी निर्दोष को तंग नहीं करने दिया जाएगा। जांच के दौरान हिंसात्मक गतिविधियों के आरोपी पाए जाने वालों के साथ सरकार अपने तरीके से निपटते हुए उनका खुलासा करे। उन्होंने कहा कि हम आरक्षण की लड़ाई में न तो हिंसा के पक्ष में थे और न ही इस प्रकार की हिंसात्मक कार्रवाई करने वालों का सर्पोट करेंगे चाहे वो किसी भी जाति का हो। अब तक हमारा मकसद शांती पूर्वक ढंग से आरक्षण पाना था और आगे भी केंद्र में शांति पूर्वक ढंग से ही आरक्षण की मांग रखी जाएगी।