इस बार जेठ के महीने में भी डेंगू का लार्वा पनप रहा है। जून के मध्य तक जांच में विभाग को अब तक जिलेभर में 79 जगह डेंगू का लार्वा मिला है, जो विभाग के लिए परेशानी बना हुआ है। पिछले साल एक बच्चे सहित तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 230 एलाइजा जांच में पॉजिटिव पाए गए थे, लेकिन इस बार लार्वा की उत्पत्ति ज्यादा नजर आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने भी सीजन से तीन माह पहले ही एंटी लार्वा अभियान शुरू कर दिया है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनीत यादव व महामारी विशेषज्ञ डॉ. नितिन गुप्ता की देखरेख में 131 टीमें डेंगू लार्वा की जांच में घर-घर जाकर कूलरों व स्टोरेज पेयजल के अन्य स्रोतों को खंगाल रही है। डेंगू मच्छर की ब्रीडिंग मई से लेकर जुलाई माह तक ज्यादा होती है। इसके बाद इसके पनपने व उसकी सक्रियता ज्यादा बढ़ जाती है। अगस्त से दिसंबर माह तक यह लोगों को खूब सताता है। इसी को ध्यान रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गत वर्ष के मुकाबले इस बार अपनी गलतियों से सबक लेते हुए पहले ही जिलेभर में जन जागरूकता अभियान छेड़ दिया है। डेंगू लार्वा की जांच के लिए घरों की दहलीज पर जाकर दस्तक भी देनी शुरू कर दी है। मेडिकल ऑफिसर की मौजूदगी में फील्ड वर्कर इस काम में जुट गए हैं।
बुखार पीड़ितों की स्लाइड बनाना शुरू
डेंगू मच्छरों को पनपने से रोकने व समय रहते लोगों को इससे जागरूक करने के लिए विभाग की 131 टीमें लगी हुई हैं। हर एक सब सेंटर पर एक टीम है। इसमें मेडिकल ऑफिसर, एमपीएडल्ब्यू मेल, एएनएम सहित दो अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं। टीमें उन जगह पर विशेष फोकस रखते हुए बुखार पीड़ितों की स्लाइडें बना रही हैं जहां-जहां डेंगू का लार्वा मिला है। अब तक जिलेभर में 2089 बुखार पीड़ितों की जांच की जा चुकी है और रक्त की 2220 स्लाइड बनाई जा चुकी हैं। बुखार पीड़ितों से कुछ ज्यादा स्लाइडें बनाने के पीछे वजह उनके संपर्क में रहने वाले कुछ अन्य लोग भी रहे हैं।
कितने कूलर, टैंक खंगाले
डेंगू की रोकथाम के लिए मई माह से ही विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। इस दौरान अब तक 46 हजार 419 घरों, प्लॉटों व अन्य स्थानों की जांच में 22 हजार 96 पेयजल टैंकों, बर्तनों व अन्य की जांच की जा चुकी है। इसमें 43 जगह डेंगू का एक्टिव लार्वा मिला था, जबकि 18 हजार 387 कूलरों को खंगालने के दौरान 26 कूलरों में लार्वा पाया गया। कुल मिलाकर मई में 69 तो 15 जून तक की अवधि में 10 जगह लार्वा सक्रिय मिला। ऐसे में अब डेढ़ माह में अब तक 79 जगह डेंगू का लार्वा मिलने से विभाग के अधिकारी भी चिंतित हैं। सबसे ज्यादा लार्वा अबकी बार माजरा दूबलधन में मिला है और उसके बाद बहादुरगढ़ की श्याम कॉलोनी व कुछ अन्य जगहों पर।
लैब में 30 जून से जांच शुरू
डेंगू पॉजिटिव केस को लेकर विभाग के अधिकारियों ने सभी प्राइवेट हॉस्पिटल व लैब संचालकों को कड़ी हिदायत दी है कि वे रैपिड कार्ड टेस्ट को पॉजिटिव न मानें और उसे संभावित मानकर नागरिक अस्पताल बहादुरगढ़ में उनके जांच सैंपल भेजें, ताकि एलाइजा जांच से उनकी रिपोर्ट कंफर्म हो सके। इसको ध्यान रखते हुए अबकी बार 30 जून से ही लैब में सैंपलों की जांच शुरू हो जाएगी, जबकि गत वर्ष में यह काम 25 अगस्त से शुरू हुआ था। ऐसे में काफी लोगों को निजी लैबों में खूब पैसे खर्च कर आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ा था। मगर अब इससे राहत दिलाने के लिए यह सब इसी माह से किया जा रहा है।
600 से ज्यादा में नहीं होगी जांच
सभी अस्पताल व लैब संचालकों को बाकायदा विभाग की ओर से नोटिस दिए गए हैं कि वे डेंगू को लेकर जांच के नाम पर मोटे पैसे न वसूलें। वे इस जांच के लिए केवल 600 रुपये ले सकते हैं। यही नहीं उक्त नोटिस को वे अपनी लैब में जरूर चस्पा कराएं, ताकि लोग किसी भी तक के भ्रम में न रहें।
तीन माह पहले की शुरुआत
पिछले साल बहादुरगढ़ व उसके आसपास के क्षेत्रों में डेंगू पॉजिटिव केस खूब निकले। लाइनपार क्षेत्र के अलावा मांडोठी, नूना माजरा, कानोन्दा, परनाला, बामनोली, छुछकवास, दुजाना, माजरा दूबलधन सहित कई गांवों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। गत वर्ष जहां केस ज्यादा मिले थे वहां पर भी विभाग की पूरी नजर है। डेंगू मच्छर को पनपने से रोकने के लिए अबकी बार पिछली कुछ गलतियों से सबक लेते हुए तीन माह पहले ही एंटी लार्वा एक्टिविटीज शुरू की गई हैं। आमजन को भी जागरूक किया जा रहा है।
-डॉ. नितिन गुप्ता, महामारी अधिकारी, झज्जर।