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कुल 101 पदों में से कार्यरत हैं मात्र 29 कर्मचारी

Fri, 17 Jun 2016 01:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़
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electricity - फोटो : Bureau
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उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम का बादली बिजली सब स्टेशन इन दिनों कर्मचारियों की कमी झेल रहा है। जिसका सबसे बुरा असर मुख्यमंत्री की योजना मेरा गांव जगमग गांव पर पड़ रहा है। जिसका परिणाम अभी तक चुने गए गांवों में जीरो ही है। न तो घरों के बाहर मीटर लग पाए हैं तो न ही गांवों में अन्य मापदंड पूरे हो सके हैं। सब स्टेशन क्षेत्र के करीब 23 गांवों में बिजली की सप्लाई के लिए मात्र 29 कर्मचारी ही काम रहे हैं, जबकि विभागीय तौर पर 101 कर्मचारियों की जरूरत है। कई सालों से कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी होने के बजाय कमी होती जा रही है।
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यहां बिजली वितरण निगम में 23 हजार उपभोक्ताओं के लिए मात्र 29 कर्मचारी तैनात हैं। इनमें भी 14 कर्मचारी डीसी रेट पर लगे हैं, जबकि 2 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। ऐसे में विभाग का काम राम भरोसे चल रहा है। फाल्ट हो जाए तो उसे दूर करने में कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि हर माह कर्मचारियों की कमी की जानकारी विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजी जाती है मगर कोई कर्मचारी नहीं बढ़ाया जा रहा।
यूएचबीवीएन के बादली ऑफिस में कर्मचारियों की संख्या पर नजर डाली जाए तो जेई फर्स्ट की एक पोस्ट होनी चाहिए और वह भी खाली पड़ी है। जेई एसटीएन की एकमात्र पोस्ट खाली है। एएफएम की दो पोस्ट में से विभाग एक एएफएम से ही काम चला रहा है। एलएम की 17 पोस्ट होनी चाहिए मगर विभाग 10 से ही काम चला रहा है।
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इसी तरह से एएलएम में भी 47 में से 40 पद रिक्त हैं, जिनमें सातों कर्मचारी डीसी रेट पर काम कर रहे हैं, जबकि सीसी के बिना ही विभाग को काम चलाना पड़ रहा है। विभाग के पास एलडीसी भी मात्र 2 है और आवश्यकतानुसार 4 एलडीसी जरूरी हैं। इनमें भी एक सस्पेंड चल रहा है और 2 डीसी रेट पर विभाग का काम चला रहे हैं। यूडीसी की दोनों पोस्ट खाली है। वहीं, एमआर के 3 पद रिक्त पड़े हैं। बीडी पद के लिए चारों कुर्सियां खाली हैं। हर माह लाखों का लेखा-जोखा तैयार करने के लिए सीए भी नहीं हैं। सीकेड़ी 2 में से 1 डीसी रेट पर ही है। एसएसए के बिना ही विभाग का कामकाज प्रभावित हो रहा है, क्योंकि 2 कुर्सियां एसएसए की बाट जोह रही है। विभाग के पास डीमैन, चालक और माली के पद भी रिक्त पड़े हैं। कर्मचारियों की परेशानियों का कोई पैमाना नहीं है। निगम के एसडीई के सामने भी सभी गांवों में शेड्यूल के अनुसार बिजली सप्लाई करना आसान नहीं है। जिससे उन्हें बिजली सप्लाई की जिम्मेदारी के साथ-साथ लोगों के रोष का सामना भी करना पड़ जाता है।

क्षमता बढ़ी कर्मचारी नहीं
पिछले वर्ष सब स्टेशन को 33 केबी से बढ़ाकर 132 केबी कर दिया गया। मगर इसके बाद भी कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बजाय घटती गई। इसी का परिणाम है कि जब कोई फाल्ट होता है तो ठीक कराने में दो चार घंटे नहीं बल्कि दो से चार दिन तक लग जाते हैं।   

चोरी पर नियंत्रण नहीं
कर्मचारियों की कमी के चलते बिजली चोरी रोकने में भी दिक्कत आ रही है। बिजली चोरों केञ हौंसले बुलंद रहते है क्योंकि उन्हें मालूम है कि कर्मचारियों की कमी की चलते छापामार कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकती है। गुभानाि स्थित मिनी इंडस्ट्रीज में तो कभी बिजली कर्मचारी नजर तक नहीं आते हैं क्योंकि उन्हें फाल्ट ठीक कराने से ही फुर्सत नहीं मिलती। जबकि मिनी इंडस्ट्रीज में  प्रति माह लाखों रुपए का चूना विभाग को बिजली चोरी कर लगाया जा रहा है।

क्या कहते है एसडीई
बादली सब स्टेशन के एसडीई खूबचंद के अनुसार कार्यालय में कर्मचारियों की कमी के मासिक रिपोर्ट भेजी जाती है मगर कर्मचारियों को नहीं बढ़ाया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि कमी तो पूरे प्रदेश में चल रही है मगर बादली में 23 हजार उपभोक्ताओं के लिए मात्र 29 कर्मचारियों का होना विभाग के पास एक बड़ी चुनौती है। इसके बाद भी कर्मचारी हर फाल्ट को दूर करने में अपना भरपूर योगदान निभा रहे हैं।
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