सरकार द्वारा एक अप्रैल से अनाज मंडी में खरीद की दावेदारी को आज तीन दिन बीत चुके हैं, और अभी तक एक भी खरीद एजेंसी मंडी तक नहीं पहुंची है। जिस कारण किसान परेशान हैं। यही नहीं किसानों की समस्या तब और बढ़ गई जब संबंधित अधिकारियों ने किसी दिन की गारंटी न लेने की बात कही।
अब ऐसे में खरीद न होने पर किसान को मंडी में रात काटनी पड़ती है तो उससे भी चार्ज लिया जा रहा है। देश का पेट भरने वाले किसान के लिए मंडी में खाने की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। वही पहले वाला ढुलमुल रवैया, परेशान किसान कैसे कहे कि अच्छे दिन आने शुरू हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आज रविवार छुट्टी का दिन है इस लिए एजेंसियां नहीं पहुंची, लेकिन किसान गेहूं की तैयार हो चुकी टूटती बालियों से कैसे कहे के आज छुट्टी का दिन है रुक जाओ।
मंडी में सरकार द्वारा अभी तक ऐसा प्रावधान नहीं किया गया है कि गेहूं को तुरंत खरीद कर किसान को चैन दिला सकें। कोई भी किसान अगर मंडी में गेहूं लेकर आता है तो उसे आढ़तियों के पास डालता है। अगर वह अपने गेहूं के उठान का इंतजार करे तो सरकार ने उनके लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की हुई कि वह मंडी में रात गुजार सकें। अगर किसान को मंडी में रात गुजारनी है तो उनसे रात भर का चार्ज लिया जा रहा है। कई किसानों का कहना है कि खेत से गेहूं को निकलवाकर सीधे मंडी पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी जेब में कई बार कोई पैसा नहीं होता, लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार तो उन्हें चार्ज देना जरूरी है। सारी परेशानी को एक किसान के सर मढ़ दिया जाता है।
इस बारे में मंडी सुपरवाइजर सुरेश से बात करने पर उन्होंने कहा कि अगर किसी किसान को रात में ठहरना पड़ता है तो उसके लिए उसे रात भर का 45 रुपये के हिसाब से चार्ज देना होगा। खाने की व्यवस्था किसान को अपने स्तर पर ही करनी होगी इसके लिए उनके पास कोई प्रावधान नहीं है।
डीएफएससी अशोक शर्मा ने कहा कि आज रविवार का दिन है। इस दिन छुट्टी रहती है इस लिए आज कोई एजेंसी नहीं आई कल से काम शुरू हो जाएगा। किसान सुनील सैनी ने कहा कि खेतों में फसल पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। जिसकी मंडी में खरीद शुरू न होने के कारण कटाई भी नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए बालियां टूटकर गिर रही हैं। जिसके कारण काफी नुकसान हो रहा है।
किसान मनीष नंबरदार ने बताया कि कई बार मंडी में फसल लेके जाने पर रात को रुकना भी पड़ जाता है, लेकिन अनाज मंडी रेस्ट हाउस में इसका चार्ज लिया जा रहा है। हर एक किसान बराबर नहीं होता कुछ काफी गरीब भी हैं। जो कि चार्ज बचाने के लिए बाहर ही मच्छरों में रात काटने पर मजबूर हो जाते हैं।