क्षेत्र में इन दिनों किसान अपने खेतों में बचे अवशेष को आग के हवाले कर रहे हैं, जबकि इससे दोहरा नुकसान हो रहा है। फसलों के अवशेष जलाने से पर्यावरण में असंतुलन, तापमान में बढ़ोतरी और खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। फसलों के अवशेष खेतों में जलाना कानून का उल्लंघन हैं। वैसे तो कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए जनजागरण अभियान चला रहा है। मगर किसानों के कानों में जूं नहीं रेंग रही और अपने ही खेतों का दुश्मन बनकर काम कर रहा है। इतना ही नहीं किसानों को आसपास के क्षेत्र में आग फैलने का खतरा भी होता है और आग लगाने के बाद खेतों में कहीं नजर भी आते है।
आग की कई घटनाएं तो बाद में भयंकर रूप ले लेती है। कई खेतों के ऊपर से तो बिजली की लाइन भी है जिससे बड़े नुकसान की आशंका बनी रहती है। जिला उपायुक्त, उपमंडल अधिकारी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने का आह्वान करते हुए कहा है कि इससे खेतों मे खड़ी दूसरी फसलों को आग से नुकसान होने का खतरा बना रहता है। किसानों को फसल के अवशेष जलाने से होने वाले खतरों के प्रति आगाह करते हुए अवशेषों के वैज्ञानिक तरीके से समाधान के तरीके बारीकी से समझा रहे हैं मगर किसानों की समझ में अधिकारियों की बात नहीं आ रही है।
किसान तो अवशेष को खेतों से हटाने के लिए उसे जलाना ही सबसे उत्तम और आसान तरीका मान आ रहा है। वहीं कृषि अधिकारी प्रदीप राठी का कहना है कि अवशेषों को जलाने वाले किसानों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश है। जो किसान अवशेष जलाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने किसानों को अवशेष न जलाने की सलाह भी दी है तो कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।