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स्कूल फीस माफी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

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---फोटो 1 : सुप्रीम कोर्ट में स्कूल फीस माफी की याचिका को लेकर चर्चा करते अभिभावक। - फोटो : Bahadurgarh
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स्कूल अभिभावक संघर्ष संघ बहादुरगढ़ द्वारा लगाई गई कोरोना काल की निजी स्कूल फीस माफी की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई सोमवार 14 सितंबर को होगी। सुनवाई के एक दिन पहले रविवार को शहर के वार्ड-24 में संघ से जुड़े अभिभावक इकट्ठे हुए और सुप्रीम कोर्ट से अपने पक्ष में आदेश आने की उम्मीद जताई।
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रविवार को इकट्ठे हुए अभिभावकों में प्रदीप गुप्ता, यशपाल हिंदुस्तानी, पायल, पल्लवी, पूजा, बबीता, पूनम, दीपिका, बिमला, टेकचंद पाराशर, सीताराम, विजय, कमलेश, सुधा, नीलम, कृष्ण मालीवाल, बलराज, रोशन, रितु, सुरजावती, सुमन, सुदेश, संगीता, कृष्णा, नैंसी, दीपा, राजबाला, खजानी, पिंकी, दयानंद, सतपाल वत्स व सतवीर भी शामिल थे। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका मंजूर होने की खुशी में मिठाई बांटी गई। सभा में अभिभावकों ने कहा कि स्कूल संचालकों द्वारा पढ़ाई कराए बिना ही 6 महीने की फीस वसूलने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। ऑनलाइन कक्षा के बहाने से लेकर बच्चों का नाम काटने तक की चेतावनी बार-बार देकर अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है। जबकि लॉकडाउन में मिली छूट के बाद भी काम धंधों की स्थिति पुराने ढर्रे पर नहीं आ रही। जिसके चलते लाखों लोग या तो अपने काम धंधों से हाथ धो बैठे हैं या इतना ही कमा पा रहे हैं जिससे गुजर-बसर हो सके।
बहादुरगढ़ निवासी नीरज गौतम ने स्कूल फीस माफ कराने की प्रार्थना को लेकर बहादुरगढ़ अभिभावक संघर्ष संघ की ओर से एडवोकेट सरोज त्रिपाठी के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। अभिभावक संघर्ष संघ के प्रदीप गुप्ता ने बताया कि ने उच्चतम न्यायालय से निजी स्कूल की नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक की सारी स्कूल फीस माफ कराने, ई-एजुकेशन चार्जेज से राहत दिलाने, मार्च, अप्रैल, मई व जून की फीस न दे पाए बच्चों के नाम काटने पर रोक लगाने, स्कूल बंद हैं तो ट्यूशन फीस भी माफ कराने, फीस देने में असमर्थ बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित न करने, इस वर्ष ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी पर रोक लगाने, इस वर्ष ली जा चुकी हर तरह की फीस को वापस कराने की गुहार लगाई है।
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सभा में वक्ताओं ने कहा कि कोरोना के चलते सभी वर्ग अपने काम धंधों में भारी घाटे के कारण बिजली बिल, बंद दुकानों के किराए, कर्जों की देनदारी तक नहीं चुका पा रहे। ऊपर से निजी स्कूल फीस को लेकर अभिभावकों को चेतावनी दे रहे हैं। निजी स्कूल वाले निजी प्रकाशकों की पुस्तकें, स्कूल ड्रेस, जूते व अन्य मदों से मोटी कमाई करने के बावजूद बार-बार अपने स्टाफ को सैलरी देने के नाम पर सरकार की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। गुप्ता ने कहा कि बार-बार सरकारी आदेशों के बदलने से अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, इस वजह से बहादुरगढ़ अभिभावक संघर्ष संघ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इस याचिका पर सुनवाई सोमवार 14 सितंबर को होगी।
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