हरियाणा के झज्जर के सासरौली गांव निवासी वीरेंद्र उर्फ गूंगा पहलवान का खेल रत्न न मिलने पर एक बार फिर से दर्द उभर आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर को अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने लिखा है कि मुझे पांच डेफ ओलंपिक मेडल जीतने के बाद भी खेल रत्न नहीं मिला और न ही हरियाणा सरकार की पॉलिसी के तहत 8 करोड़ रुपये दिए, मेरा गुनाह सिर्फ इतना है कि मैं मूक-बधिर दिव्यांग खिलाड़ी हूं।
यहां बता दें कि करीब सवा माह पहले वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में कुश्ती लड़ते समय उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया, लेकिन अस्पताल से छुट्टी मिलते ही चोटिल हाथ से ही वीरेंद्र फिर से अखाड़े में अभ्यास करने में जुट गए थे। उनका सपना चैंपियनशिप 2024 और डेफ ओलिंपिक 2025 में देश को पदक दिलाना है।
वीरेंद्र सिंह उर्फ गूंगा पहलवान पांच बार डेफ ओलंपिक खेल चुके हैं। वह तीन बार स्वर्ण और दो बार कांस्य पदक जीत चुके हैं। इतना ही नहीं वीरेंद्र सिंह की उपलब्धियों को देखते हुए केंद्र सरकार उन्हें भीम अवॉर्ड, अर्जुन अवॉर्ड, पद्मश्री, नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित कर चुकी है।
फिलहाल उन्होंने मेजर ध्यानचंद खेल रत्न के लिए नामांकन किया हुआ है। वीरेंद्र पहलवान 2014 से खेल विभाग में कोच की नौकरी कर रहे हैं। उनकी नियुक्ति करनाल में है, लेकिन हाथ में लगी चोट के कारण वे दो माह की छुट्टी पर चल रहे हैं।
महिला पहलवानों का भी किया था समर्थन
गूंगा पहलवान महिला पहलवानों के आंदोलन व उनका समर्थन कर भी सुर्खियों में आ चुके हैं। पिछले दिनों भी साक्षी मलिक व बजरंग पूनिया के पदक लौटाने पर उन्होंने भी पदक लौटाने की घोषणा की थी।