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डेढ़ माह में ही टूट और धस गई ड्रेन

Thu, 18 Sep 2014 12:30 AM IST
तपस्वी शर्मा /अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
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डेढ़ माह में ही टूट और धस गई ड्रेन
 225 लाख रुपये की लागत से बनी थी खातीवास-तलाव  
करीब डेढ़ महीने पहले सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने जिस ड्रेन का उद्घाटन किया था वह पानी के बहाव में टूट कर बिखर रही है। ड्रेन सिर्फ टूटी ही नहीं हैं बल्कि कहीं-कहीं धस चुकी है तो कहीं सीमेंट और लोहा अलग-अलग हो चुका है।

तलाव गांव के समीप से गुजर रही इस  ड्रेन की हालत करीब आधा किलोमीटर दूर तक देखने को मिली। यह ड्रेन इतनी जल्दी टूट जाएगी, इस बात का किसी को अंदाजा नहीं था।
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ग्रामीण ड्रेन की हालत देख कर हैरान भी है और परेशान भी। लेकिन विभाग की शिकायत करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है।

जबकि साफ दिख रहा है कि इस ड्रेन के बनाने में बड़े पैमाने पर गोलमाल हुआ है। इसका जिम्मेदार कौन है, इस बात की जांच करना सरकार का काम है।

उल्लेखनीय है कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा द्वारा बेरी-दुजाना-धौड़  लिंक ड्रेन बुर्जी नंबर 0 से 30200 का सीमेंट कंकरीट द्वारा निर्माण करवाया गया था।

लेकिन निर्माण करवाने के कुछ माह बाद ही गांव तलाव के समीप करीब आधा किलोमीटर तक ड्रेन बिल्कुल ध्वस्त हो चुकी है, ड्रेन के दोनों ओर की परत टूट गयी है जबकि काफी एरिया में लंबी दरारें भी आ गयी हैं।

जिसके चलते उस एरिया का हिस्सा भी जल्दी टूटने का अंदेशा बना हुआ है। इस ड्रेन में आसपास के खेतों रास्ते में  भूमि कटाव भी होने लगा है।

ड्रेन के पास  गुजरते रास्ते से पहले जहां ट्रैक्टर तक निकल जाया करते थे, वहां अब रास्ता इतना संकीर्ण हो गया है कि, वहां से निकलने में भी दिक्कत हो रही है।

विभागीय कार्यवाही के डर से न तो कोई किसान कुछ बोलने को तैयार है और न ही गांव के सरपंच। लेकिन दबी आवाज में ग्रामीण विभाग और विभाग को कोस रहे हैं और कह रहे हैं कि आखिर इतना बड़ा गोलमाल हुआ कैसे।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर ग्रामीण इसकी शिकायत की जाती है तो विभाग द्वारा उन्हें अनावश्यक तंग किया जाता है। लेकिन जो स्थिति है वो सभी के सामने है। किसी से कुछ छिपा नहीं है।

राहत बन गयी आफत

किसानों को राहत देने के लिए बनायी गयी ड्रेन अब किसानों के लिए आफत बन गयी है। किसान कहते हैं कि इस ड्रेन से किसानों को तो कोई फायदा हुआ हो या न हुआ हो, लेकिन विभागीय अधिकारी और ठेकेदारों को जरूर फायदा हुआ है।

जितनी जल्दी सीमेंट और लोहे से बनी यह ड्रेन टूट गये हैं, इतनी जल्दी तो कच्ची ड्रेन भी नहीं टूटती। इससे विभाग की कार्यशैली पर शक होना जायज ही है।

मात्र तीन इंच मोटी है सीमेंट की परत

गांव तलाव के समीप ड्रेन के निर्माण में क्या घपलेबाजी हुई है। उसका इसी से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि ड्रेन के दोनों ओर मात्र तीन इंच की ही सीमेंट की परत चढ़ायी गयी है।

जिससे चलते कुछ माह में ड्रेन पानी का बहाव नहीं झेल पायी और सब कुछ पानी में ही बहता चला गया। विभागीय अधिकारी अब भी है कि कुछ मानने को तैयार नहीं हैं।

विभागीय अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे है कि अभी तो लाइबीलिटीज पीरियड में है ठीक करवा दिया जाएगा। जिससे साफ जाहिर होता है।

बेरी-दुजाना-धौड़ लिंक ड्रेन की लागत आयी थी कुल तैंतीस करोड़

बेरी-दुजाना-धौड़ लिंक ड्रेन को बनाने में कुल लागत 33 करोड़ रुपये की आयी है, वहीं तलाव गांव से खातीवास तक जहां पर ड्रेन क्षतिग्रस्त हुई है। वहां तक बनाने की लागत 225 लाख रुपये की आयी है।

ड्रेन की ड्राईंग को लेकर भी उठ रहे है सवाल

किसी भी ड्रेन के निर्माण के लिए ड्राईंग एक अहम हिस्सा होती है। सवाल यह है कि जहां से भी यह ड्रांईग बनी क्या उसकी धरातल पर जांच पड़ताल हुई थी। ऐसे में ऐसी ड्राईंग को लेकर भी सवाल उठ रहे है।
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क्या कहते है विभाग के कार्यकारी अभियंता

सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रमेश कुमार का कहना है कि तलाव गांव के पास जो ड्रेन क्षतिग्रस्त हुई है, उसके लिए ठेकेदार को तलब किया गया है। हालंाकि अभी लायबीलिटीज पीरियड में है। इसके लिए एक वर्ष तक जिम्मेवारी ठेकेदार की ही है।
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