टीकरी बॉर्डर क्षेत्र में कबड्डी प्रतियोगिता समारोह में खिलाडिय़ों के साथ पूर्व सीएम भूपेंद्र ह
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बहादुरगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा मंगलवार को एक बार फिर टीकरी बॉर्डर पर धरनारत किसानों के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने आंदोलनरत किसानों से चर्चा की। उन्होंने यहां किसानों के समर्थन में आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता भी देखी। खिलाड़ियोें से मुलाकात करते हुए हुड्डा ने कहा कि कुश्ती और कबड्डी जैसे खेल हमेशा किसानी से जुड़े रहे हैं। कुश्ती, कबड्डी और किसानी एक ही बात है। पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि देश का अन्नदाता डेढ़ माह से अपना घर छोड़कर सड़कों पर बैठा है, लेकिन सरकार उसकी मांगें मानने के बजाय तारीखों के फेर में उलझा रही है। शांतिपूर्ण अनुशासित तरीकेे से इतने बड़े आंदोलन को चला रहे हैं, जो अपने आप में भारत में ही नहीं, दुनिया में एक मिसाल है। किसानों के संयम की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी कि 60 से ज्यादा किसानों की शहादत के बावजूद आंदोलनकारी किसानों ने धैर्य नहीं छोड़ा। हुड्डा ने कहा कि वो लगातार टीकरी बॉर्डर समेत प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में धरने पर बैठे किसानों के बीच गए हैं। उनसे बातचीत से स्पष्ट है कि वो सरकार से किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। इसके उलट, सरकार समाधान के बजाय टकराव के रास्ते पर चल रही है। सरकार इसको नाक की लड़ाई न बनाए। जनता की जायज मांगों को स्वीकार करना सरकार का फर्ज है। सरकार इसको जीत-हार के नजरिए से न देखे। सरकार का पहला फर्ज है कि जनता खुश और प्रसन्न रहे।
हुड्डा ने मुख्यमंत्री की ओर से आयोजित की गई किसान पंचायत के बारे में कहा कि ऐसे आयोजनों का मकसद सिर्फ टकराव की स्थिति पैदा करना है। मुख्यमंत्री को ऐसे आयोजन करने के बजाय केंद्र सरकार से बात करनी चाहिए और उसे तीनों कृषि कानून वापस लेने के लिए मनाना चाहिए। मुख्यमंत्री जनता के प्रतिनिधि हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए किसानों का साथ देना चाहिए। मुख्यमंत्री द्वारा आंदोलन के पीछे कांग्रेस का हाथ बताने वाले सवाल का जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि आंदोलन के लिए कांग्रेस नहीं बल्कि बीजेपी की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। उसने ही किसानों पर उनकी सहमति के बिना तीन कानून थोपे हैं। सरकार की गलत नीतियां बार-बार किसानों को गहरे घाव दे रही हैं। उन पर मरहम लगाने के बजाय मुख्यमंत्री उन्हें कुरेद रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार की तरफ से बड़ी तादाद में किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि कटुता को खत्म करके भाईचारे का माहौल सरकार बनाए। लोकतंत्र में जनभावनाओं और अहिंसक आंदोलनों को इस तरह से दबाया नहीं जा सकता। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों पर बार-बार वाटर कैनन और आंसू गैसे के गोलों का इस्तेमाल करना अलोकतांत्रिक तरीका है। सरकार को किसानों के प्रति द्वेष भावना या बदले की नीयत से कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दोहराया कि किसानों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। आखिर किसानों की मांग ही क्या है कि सरकार ने जो तीन काले कानून बनाए हैं उन्हें वापस ले। इससे सरकार के खजाने पर एक पैसे का बोझ नहीं पड़ेगा। इसलिए वो पहले दिन से उनकी मांगों का समर्थन कर रहे हैं। किसानों के हक के लिए वो हर तरह की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। वो लगातार राज्यपाल से मुलाकात के लिए वक्त मांग रहे हैं, लेकिन अब तक उन्होंने वक्त नहीं दिया है। 15 जनवरी को कांग्रेस किसानों की मांगों को लेकर राजभवन का घेराव भी करने जा रही है।