बहादुरगढ़। धरनारत किसानों के टीकरी बॉर्डर-बहादुरगढ़ पड़ाव में मंगलवार को एक और आंदोलनकारी किसान की मौत हो गई। यह किसान भी पंजाब के मुक्तसर साहिब जिले के निवासी थे। पिछले दो दिनों में मुक्तसर जिले के तीन किसानों की मौत हो चुकी है। जबकि टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन शुरू होने से अब तक 17 किसानों की जान जा चुकी है।
मुक्तसर जिले के गांव लोहरा निवासी किसान अवतार सिंह (80) 26 नवंबर को किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए टीकरी बॉर्डर आए थे। वह तभी से अपने गांव के साथी किसानों के साथ दिल्ली-रोहतक रोड पर दुर्गा फिलिंग स्टेशन के निकट ठहरे हुए थे। मंगलवार को सुबह हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय दहिया के अनुसार सुबह करीब सवा नौ बजे उन्हें मृत हालत में नागरिक अस्पताल लाया गया। अस्पताल से सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और जांच आरंभ की। मृतक के परिजनों को भी सूचित किया गया। उनके निकट ही ठहरे हुए किसानों जसविंदर सिंह, हरबंस व गुरशरण सिंह ने बताया कि अवतार सिंह हर रोज सुबह जल्दी जाग जाते थे। मंगलवार सुबह करीब 5 बजे उनको चाय के लिए पुकारा गया तो वह नहीं उठे। कई बार आवाज लगाने पर भी वह नहीं जागे तो उन्हें हिलाकर जगाने की कोशिश की गई। इस पर भी उनके शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो साथियों को चिंता हुई और उनको अस्पताल ले जाया गया। नागरिक अस्पताल में डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
टीकरी बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों ने बीते वर्ष 26 नवंबर को डेरा डालना शुरू किया था। तब से अब तक यहां 17 किसानों की मौत हो चुकी है। जिनमें अकेले पंजाब के जिला मुक्तसर साहब के तीन किसान शामिल हैं। इनमें दो की मौत बीते सोमवार को और एक (अवतार सिंह) की मौत मंगलवार को हुई। सोमवार को मुक्तसर जिले के गांव लूडेवाला के किसान जगदीप (60 वर्ष) की और इसी जिले के गांव अबूल खुराना के निवासी युवा किसान टीटू सिंह (40) की मौत हो गई थी। अवतार सिंह और अन्य किसानों को मंगलवार को टीकरी बॉर्डर व पकौड़ा चौक के निकट आयोजित सभाओं में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बलबीर सिंह व अन्य वक्ताओं ने कहा कि इन किसानों का बलिदान खाली नहीं जाएगा और सरकार को तीनों काले कानून वापस लेने होंगे। उन्होंने कहा कि एमएसपी के लिए भी कानून मेें स्थायी प्रावधान करना होगा।