फोटो-61: बहादुरगढ़ में कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद
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बहादुरगढ़। शहर के ओमैक्स सिटी स्थित श्रीकृष्णशरणम धाम सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमदभागवत कथा ज्ञानयज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। कथा व्यास युगल कृष्णाचार्य महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की लीला का वर्णन किया।
कथावाचक ने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा है, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की है। श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में होना और वासुदेव द्वारा उन्हें गोकुल पहुंचाना, देवकी-वसुदेव की पीड़ा, कंस का अत्याचार तथा नंद-यशोदा के घर आनंद का वातावरण, इन सभी प्रसंगों का सजीव वर्णन किया गया। श्रीकृष्ण जन्म की झांकी प्रस्तुत की गई। इससे पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा।
युगल कृष्णाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल पूजा का विषय नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने प्रेम, करुणा, धर्म और कर्म का मार्ग दिखाया। आज के युग में श्रीकृष्ण की शिक्षाएं मानव जीवन के लिए प्रासंगिक हैं। कथा के दौरान भजनों व संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा।