नवाबों के गांव दुजाना में रविवार को पाश्चात्य एवं हरियाणवी संस्कृति का गजब का संगम दिखा। आस्ट्रेलिया से यहां घूमने आए छात्रों के दल में शामिल पर्यटक गांव में पहुंचे तो उनका पहनावा स्थानीय पहनावे से बिल्कुल हट कर रहा। कुछ ग्रामीण पहनावे को देखकर हंसे तो कुछ की भौवें भी तनी, इन सबके बावजूद विदेशियों का स्वागत तिलक के साथ हुआ।
ग्रामीणों ने उनको पगड़ी बांधी तो टी शर्ट व निक्कर पर हरियाणवी संस्कृति की छटा खूब बिखरी।
आस्ट्रेलियाई विद्यार्थियों का एक दल इंडियन कल्चर से रूबरू होने देश में आया है। रविवार को इसमें शामिल विद्यार्थी गांव दुजाना पहुंचे। ग्रामीणों ने उनका यहां जोरदार स्वागत किया। टीम में शामिल माइकल ने बताया कि आस्ट्रेलिया के एक विद्यालय से दो शिक्षक व कई विद्यार्थी अंतरदेशीय सांस्कृतिक जीवन व रहन-सहन के बारे में ज्ञान अर्जित करने व विचार साझा करने के लिए भारत आए हैं। ग्रामीणों की ओर से सभी विदेशी मेहमानों का फूल माला व पगड़ी के साथ स्वागत किया गया।
उसके बाद छात्र समूह ने गांव के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। साथ ही आमजन से यहां के रहन-सहन व रीति रिवाजों के बारे में जानकारी ली। गांव दुजाना में स्वागत से भाव-विभोर विदेशी छात्र व शिक्षक हरियाणवी पगड़ी बांधे जाने पर एक-दूसरे के फोटो व सेल्फी लेते नहीं थके। आस्ट्रेलियाई शिक्षकों ने ग्रामीणों ने प्रश्न पूछे और जवाब भी दिया।
उन्होंने कहा कि यहां इंडियन कल्चर में आकर बहुत अच्छा लगा। मौका मिला तो फिर जरूर आएंगे। उन्होंने गांव दुजाना की मस्जिद का भ्रमण किया और नवाबों के समय का इतिहास जाना। चेतनालय स्वयं सहायता समूह की सदस्या सरिता ने बताया कि शिक्षक व छात्रों द्वारा संस्थान के पदाधिकारियों से संपर्क किया गया और हरियाणवी जन-जीवन जानने की उत्सुकता जताई।
इस पर संस्था के कोऑर्डिनेटर मनोज जैन ने गांव दुजाना में उनके स्वागत व जानकारी उपलब्ध कराने के लिए गांव की ही पंजाबी धर्मशाला में कार्यक्रम रखा। इसके माध्यम से हरियाणा की समृद्ध संस्कृति के बारे में आस्ट्रेलियन छात्र समूह को जानकारी दी गई। इस अवसर पर दुजाना निवासी हरियाणवी कलाकार दीपक कूपर, सीमा दहिया, योगेश दुजाना, मनोज जैन, जसबीर अहलावत, सुधीर अहलावत दीपक, कृष्ण चंद आदि के अलावा संस्था के पदाधिकारी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं व ग्रामीण मौजूद रहे।