तापमान में आई गिरावट के कारण सोमवार को दिन भर धुंध छाए रहे। शहर में कोहरे के चलते दो-तीन फुट की दूरी पर भी साफ नहीं दिख रहा था।
गांवों व खेत-खलिहानों की तरफ तो एक कदम पर भी कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। ठिठुरन और हवा के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। इसके चलते शहरों का जनजीवन जहां प्रभावित रहा तो दूसरी तरफ यह मौसम फसलों के लिए संजीवनी की तरह काम आया।
पिछले कई दिनों के बाद घने कोहरे ने दस्तक दी। कोहरे का कहर सुबह के करीब 11 बजे तक दिखा। कोहरे के साथ मौसम में काफी ठंडक घुली रहने से हर कोई गर्म कपड़ों में लिपटा नजर आया। खासतौर पर बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावक ज्यादा चिंतित दिखे।
रेंगकर चलते रहे वाहन
सोमवार वर्किंग डे होने के कारण स्कूल भी खूले दिखे। ऐसे में स्कूली बस चालकों को विशेष सावधानी बरतकर अपना सफर तय करना पड़ा।
यही नहीं नेशनल व स्टेट हाइवे पर भी वाहन रेंग-रेंग कर चलते दिखे। सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए चालकों ने लाइटें जलाकर व वाहनों के चारों तरफ रिफ्लेक्टिव टेप का इस्तेमाल करके अपना सफर तय करना पड़ा।
दोपहिया वाहन चालकों को खासी दिक्कतें उठानी पड़ी। कोहरे का असर साफ तौर पर ट्रेेनों पर देखने को मिला। दिल्ली-फिरोजपुर रेल खंड से गुजरने वाली 11 एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेने जहां अपने निर्धारित समय से काफी देरी से प्लेटफार्म पर पहुंची तो वहीं दो एक्सप्रेस ट्रेनें कैंसिल भी रही।
अलाव का लेते दिखे सहारा
सोमवार को ठिठुरन अधिक होने के कारण हर कोई बाहर निकलने से कतराता दिखा। कई घंटों तक कोहरा छाए रहने के कारण लोगों के रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हुए। लोग सर्दी से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते दिखे। यही नहीं मूंगफली व अन्य गर्म पकवानों की भी खूब डिमांड रही।
बिजली रही गुल
कोहरे का असर बिजली सप्लाई पर भी पड़ा। कई क्षेत्रों में बिजली लाइनों में फाल्ट आने के कारण दो-तीन घंटों तक बिजली के दर्शन ही लोगों को नहीं हुए। ऐसे में गर्म पानी न होने के चलते लोग नहाने के लिए भी परेशान दिखे। जिन घरों में इनर्वटर लगा था उनमें से अधिकांश के इनर्वटर लाइट आने की बाट जोहते जवाब तक दे गए थे।