-औषधीय पौधों के साथ फलदार पौधों को दे रही प्राथमिकता
नरेश दहिया
साल्हावास। क्षेत्र के गांव गोरिया निवासी बीना भुक्कर अपने घर में बगिया लगाकर युवतियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं।बीना भुक्कर का कहना है कि उसके पति सत्यवीर भुक्कर जैविक खेती करने वाले किसान रहे हैं।
उन्हीं से प्रेरित होकर अपने घर में पौधे लगाने की शुरुआत की। शुरू में पांच पौधे लगाए थे जिनकी संख्या आज 20 हो गई है। उन्होंने अपने खेत में लगभग सैकड़ों छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए हुए हैं। वे औषधीय पौधों को अहमियत दे रही हैं।
उन्होंने बताया कि औषधीय पौधों को लगाने से उन्हें विभिन्न प्रकार की औषधियां के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता और बहुत सारी औषधियां उन्हें पौधों से ही मिल जाती हैं। वह जब भी किसी कार्यक्रम में जाती हैं तो आने वाले अतिथि को पौधा भेंट करना नहीं भूलती।
गुलाब, पाम, गुड़हल, गुलदाउदी, मनी प्लांट, एलोवीरा, स्नेक्स प्लांट सहित कई अन्य प्रजातियां हैं। इसमें कढ़ी पत्ता व पाम के पौधे भी लगे हैं। उन्होंने पति सत्यवीर भुक्कर से पौधों की कलम बनाना भी सीखा और बाद में खुद ही पौध तैयार करने लगी। उनका कहना है कि सुबह उठते ही फूलों के पास जाने से ताजगी व मन को सुकून मिलता है।
आसपास के लोग भी हो रहे प्रेरित
बीना भुक्कर बताती हैं कि इस हरियाली भरी पहल से पड़ोसी और रिश्तेदार भी प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग उनसे पौधे लगाने और उनकी देखभाल के तरीके सीख रहे हैं। उनका मानना है कि अगर हर घर की छत या आंगन में कुछ पौधे लग जाएं तो पर्यावरण को बड़ी राहत मिल सकती है। उनका कहना है कि हरियाली के लिए बड़े संसाधनों की नहीं बल्कि जागरूकता और प्रेम की जरूरत होती है।
औषधीय पौधों हैं प्राथमिकता
बीना भुक्कर का कहना है कि तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, पुदीना, लेमनग्रास, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अडूसा, नीम, अजवाइन, हरसिंगार, गुड़हल, कनेर, अपराजिता, चमेली, रजनीगंधा, गुलाब, गेंदा, बेलपत्र और सदाबहार आदि पौधे न केवल घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि सेहत दुरुस्त रखने के भी काम आते हैं।
08jjrp12- अपने घर में लगे पौधों की देखभाल करती गांव गोरिया निवासी बीना भुक्कर। स्रोत-परिजन- फोटो : samvad