पंजाब में खाद में मिलावट का खेल लगातार जारी है और रबी सीजन के दौरान भी इसमें कमी नहीं आई। स्थिति यह है कि हर 20 में से एक सैंपल फेल हो रहा है। पहले के मुकाबले इसमें गिरावट के बजाय मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आए हैं।
कृषि विभाग ने घटिया खाद पर रोक के लिए विशेष टीमें गठित कर उनकी संख्या पांच कर दी है। पिछले वर्ष अप्रैल और जून में अभियान चलाकर 737 सैंपल लिए गए जिनमें 11 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। हाल ही में मलेरकोटला में अनधिकृत खाद और कीटनाशक भंडारण के मामले में एक फर्म के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार घटिया खाद मिट्टी और पानी को दूषित करती है और फसल की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। यह मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को कम करती है और कीट नियंत्रण भी प्रभावी नहीं रहता।
पीजीआई के प्रो. रविंद्र खैवाल के अनुसार मिलावटी खाद में अधिक रसायन और भारी धातुएं हो सकती हैं जो श्वसन रोग, गुर्दे की समस्या और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकती हैं। उन्होंने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताई है।