स्थनीय अनाज मंडी में शनिवार को हैफेड एजेंसी का खरीद का दिन था, लेकिन मंडी से केवल 11 सौ क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया। अब तक मंडी में कुल गेहूं की आवक 3 लाख 60 हजार क्विंटल के करीब हो चुकी है, लेकिन एजेंसियों द्वारा खरीद का कार्य धीमा होता जा रहा है। आवक ज्यादा होने के कारण किसानोें और आढ़तियोें को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में ऐजेंसियां पहले गेहूं खरीदती थी, लेकिन अब तो खरीद का कार्य भी कम हो चुका है। एजेंसी द्वारा उठान कार्य धीमा होने के कारण मंडी में लगभग 60 प्रतिशत गेहूं शेड से बाहर पड़ा है। अगर ऐसे समय में बारिश होती है तो सारा गेहूं भीग कर खराब हो जाएगा। शनिवार को मंडी से खरीद एजेंसियों द्वारा 19 हजार 246 क्विंटल गेहूं का ही उठान किया गया है। एजेंसियां उठान समय पर नहीं कर रहीं जिसके कारण आढ़तियों व किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियोें का कहना है कि समय पर उठान न होने से उनके पास जगह की एक तो पहले से ही कमी है दूसरा ऐजेंसियां समय पर नहीं उठा रही उन्होंने बताया कि अगर अचानक बारिश आ जाए तो उनके पास बैग में रखें गेहूं को बचाने का कोई रास्ता नहीं है। जबकि उससे कहीं ज्यादा गेहूं मंडी में वैसे ही पड़ा है।
आढ़ती पवन ने मंडी अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि गेहूं के उठान को लेकर आढ़तियों के साथ भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है। जिसको लेकर किसी किसी को तो दिन में दस दस गाड़ियां लगवाकर उठान करवाया जा रहा है और किसी को एक या दो गाड़ी भी मुश्किल से मिल पाती हैं।
आढती नरेंद्र व चाँद सिंह ने कहा कि समय पर उठान न होने के कारण पेमेंट आने में भी परेशानी हो रही है। जिसके कारण सरकार द्वारा 72 घंटें में पेमेंट करने का फार्मूला लगातार फेल होता नजर आ रहा है। समय पर पेमेंट ना आने से किसानों द्वारा रोज रोज हमारे चक्कर काटने के बाद खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है।