बहादुरगढ़। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन कृषि कानूनों पर रोक लगाने और कमेटी बनाने के आदेश के बावजूद आंदोलनकारी किसान आंदोलन से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मंगलवार को भी आंदोलन जारी रहा। पंजाब से सैकड़ों किसान टीकरी बॉर्डर पहुंचे। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक कानून वापस नहीं होंगे तब तक आंदोलन में किसानों की संख्या बढ़ती जाएगी। कम होने का सवाल ही नहीं।
टीकरी बॉर्डर क्षेत्र में धरनारत किसानों की नजर मंगलवार को दिनभर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रही। हर कोई यह जानना चाहता था कि कोर्ट का फैसला क्या आया। कोर्ट ने चार सदस्यीय कमेटी बनाने का आदेश दिया तो किसानों को निराशा हुई। लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं की प्रतिक्रिया आने से पहले टीकरी बॉर्डर पर मौजूद किसान नेता खुलकर कुछ नहीं बोले। जब मोर्चा की केंद्रीय कमेटी का रुख स्पष्ट हो गया तो यहां किसान नेताओं को बाकी सभी किसान फिर मुखर हो गए। सिरसा से आए किसान अमनदीप ने कहा कि यह तो टालने वाली बात हुई। बलबीर सिंह ने कहा कि कमेटी के बहाने किसानों के आंदोलन को खत्म करने की कोशिश है, जो हमें मंजूर नहीं है। महम से विधायक बलराज कुंडू देर शाम टीकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच पहुंचे।
कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया पूछने पर किसान नेता पुरुषोत्तम ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की मुख्य कमेटी सुप्रीम कोर्ट द्वारा चार कमेटी बनाने के सवालपर संतुष्ट नहीं है। इसलिए फिलहाल टीकरी बॉर्डर पर आंदोलन नहीं चलाने का सवाल ही नहीं। तीनों कानूनों के वापस होने और एमएसपी के लिए कानून बनने तक आंदोलन जारी रहेगा। हम यहां किसी कमेटी से बहस करने नहीं आए, हम अपनी खेती की रक्षा के लिए काले कानूनों को वापस करवाने के लिए आए हैं।
किसानों ने इलाके में तीनों हाइवे पर संबंधित कंपनियों को टोल भी नहीं वसूलने दिया। एनएच-324बी के छारा और केएमपी के मांडोठी व बादली टोल प्लाजा भी टोल फ्री रहे। एनएच-9 के रोहद टोल प्लाजा पर रोहतक जिला किसान सभा के उपाध्यक्ष कैप्टन शमशेर सिंह मलिक, सतनारायण हुड्डा, गांधरा के पूर्व सरपंच दलबीर सिंह, जनवादी महिला समिति रोहतक की वीना मलिक और अन्य किसान नेता धरना दिए बैठे रहे। इन किसानों ने टोल कंपनी वेस्ट हरियाणा हाइवेज प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों को टोल नहीं वसूलने दिया। कैप्टन मलिक ने कहा कि जब तक संयुक्त किसान मोर्चा की मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक टोल वसूली नहीं होने दी जाएगी। हरेक हाइवे पर किसानों के साथ-साथ बाकी सभी वाहन भी निशुल्क चलेंगे।
किसान नेता जसबीर सिंह ने कहा कि हमें अपनी मांगों पर कमेटी नहीं चाहिए। हमें कानूनों का निरस्तीकरण चाहिए। संयुक्त मोर्चा का अधिकृत प्रतिनिधिमंडल इस कमेटी के समक्ष पेश भी नहीं होगा। जब तक कानून खत्म नहीं होंगे और एमएसपी की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी तब तक आंदोलन खत्म करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
किसान बलबीर सिंह बोले हमारी लड़ाई न्यायालय से नहीं है। इसलिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाई गई कमेटी से भी हमारा कोई सरोकार नहीं है। हमारा विवाद सरकार से है। मांगें पूरी होने से पहले आंदोलन को किसी भी हालत में वापस नहीं लिया जा सकता, बल्कि इसमें तेजी लाई जाएगी। बुधवार को हम लोहड़ी की आग में तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाएंगे और दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस समारोह में शांतिपूर्वक भाग लेंगे। किसान अमरिंदर सिंह ने कहा कि सरकार को धमकाने भर से काम नहीं चलेगा। सरकार सोचती है कि कमेटी बनाने से हम अपने घर चले जाएंगे। यह सरकार की गलतफहमी है। हमारे साथ न्याय होगा तो हम अपने घर जाने को तैयार हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बावजूद मंगलवार को भी पंजाब से किसानों का आना जारी रहा। श्रीगंगानगर इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन और सड़क मार्ग से सैकड़ों किसान टीकरी बॉर्डर पहुंचे। किसानों के जज्बे को देखने से लग रहा था कि आंदोलन लंबा होने पर भी किसान कमजोर नहीं पड़ रहे।
महम से विधायक बलराज कुंडू देर शाम टीकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच पहुंचे। किसान रसोई में साथ खाना खाते समय सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर चर्चा करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च अदालत ने तीन काले कानूनों पर जो रोक लगाई है वह स्वागत योग्य है, लेकिन समस्या का यह समाधान नहीं है। जो कमेटी बनाई है उसमें शामिल लोग इन कानूनों की पहले से ही वकालत करने वाले रहे हैं। इसलिए इस कमेटी का कोई फायदा नहीं। माननीय सुप्रीम कोर्ट से विनम्र निवेदन है कि किसान नेताओं को कमेटी में शामिल करे जो खेती और किसानों का दर्द समझते हैं। रोजाना हो रही किसानों की शहादतें दुखदाई हैं लेकिन दुर्भाग्य कि सरकार राजहठ छोड़ने को तैयार नहीं। किसान आंदोलन इन खेती विरोधी काले कानूनों को रद्द करवाने और एमएसपी की गारंटी लेने के लिए चल रहा है, अस्थाई रोक के लिए नहीं। सुप्रीम कोर्ट से निवेदन है कि इन कानूनों को रद्द कर अन्नदाता के साथ इंसाफ करे और सरकार को निर्देश दे क्योंकि जब तक ये काले कानून रद्द नहीं होंगे किसान आंदोलन पर डटे रहेंगे और अपने घरों को तभी वापस लौटकर जाएंगे जब ये काले कानून रद्द हो जाएंगे।
आंदोलनकारियों के टीकरी बार्डर-बहादुरगढ़ पड़ाव में पंजाब के जिला मुक्तसर के गांव लोहरा के निवासी बुजुर्ग किसान अवतार सिंह (80) की मौत हो गई। उनके शव को मंगलवार सुबह करीब सवा नौ बजे नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया। अनुमान लगाया गया है कि उनकी मौत हृदयाघात से हुई।